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बर्बर योगी सरकार ने बेरोजगारों पर बरसाए डंडे, बहाया खून

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बर्बर योगी सरकार ने बेरोजगारों पर बरसाए डंडे, बहाया खून राजधानी लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे 2011 बैच के बीएडी टीईटी पास अभ्यर्थियों पर पुलिस ने बर्बर तरीके से लाठी चार्ज किया. बहुत सारे छात्र बुरी तरह से जख़्मी हुए हैं. “राष्ट्रवादी सरकार”, छात्र-युवा शक्ति का बात-बात में हवाला देने वाली भाजपा सरकार ने टीईटी के छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज करके अपने फासीवादी चरित्र को फिर से नंगा किया है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र की व संविधान की बात-बात में दुहाई देने वाली भाजपा सरकार के रामराज्य में यह पहली बार नहीं हो रही है। रोजगार, परीक्षाओं में धांधली रोकने, हक़-अधिकार आदि को लेकर छात्रों-युवाओं को आए दिन सड़कों पर इतनी बुरी तरह पीटा जा रहा है, जैसे वो कोई अपराधी हों। अभी आज के ही अखबार में करोड़ों रुपये खर्च करके योगी सरकार ने विज्ञापन ने विज्ञापन के जरिये सफ़ेद झूठ बोला है कि किस तरह शिक्षकों के खाली पद भरे गए, शिक्षकों को पदोन्नति दी गई, शिक्षकों के खाली पद भरे गये, रोज़गारपरक शिक्षा का दौर शुरू हुआ। जिन आन्दोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया है। वे छात्र 2011 से ही आन्दो...

साफ हवा की मांग कर रही इस लड़की को तमिलनाडु पुलिस ने बर्बरता से मार डाला

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साफ हवा की मांग कर रही इस लड़की को तमिलनाडु पुलिस ने बर्बरता से मार डाला  मुकेश असीम 17 साल की स्नोलिन ने अभी 12वीं पास की थी, वकील बनना उसकी आकांक्षा थी, क्योंकि स्टरलाइट (वेदांता) के फैलाये प्रदूषण की वजह से उसने दोस्तों-पड़ोसियों को कैंसर से मरते देखा था और वह उसके खिलाफ अपने समुदाय के लिए संघर्ष करना चाहती थी। वह इस आंदोलन मे सक्रिय थी और 22 मई को अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ विरोध प्रदर्शन में गई थी। तमिलनाडु का मुख्यमंत्री कहता है कि पुलिस को उससे इतना खतरा था कि उन्हें अपने बचाव के लिए उसके मुँह में पिस्तौल घुसाकर गोली मारनी पड़ी।  उसकी चाची जया बत ाती हैं, 'हम वहाँ सबके लिए लड़ने गए थे, पर उन्होने हमारी बेटी को मार डाला। वह सिर्फ 17 साल कि थी। हम वहाँ इंसाफ मांगने गए थे, गड़बड़ी फैलाने नहीं। यहाँ लोग कैंसर से मर रहे है, अगर हम खुद अपने लिए नहीं लड़ेंगे तो कौन लड़ेगा?' उसके पड़ोसी ब्रूटस ने बताया 'ये हमारे जीवन और जीविका का संघर्ष है। हम भोजन और जल बगैर कैसे जिंदा रहें? यहाँ हर कोई किसी किस्म के कैंसर से ही मरता है। वह सिर्फ मूल जरूरतों की मांग कर रही थी। वह अपने...

कितना सच, कितना झूठ - मोदी के कारण 2100 कंपनियों ने 83 हजार करोड़ के कर्ज वापस कर दिये!!

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कितना सच, कितना झूठ - मोदी के कारण 2100 कंपनियों ने 83 हजार करोड़ के कर्ज वापस कर दिये!!  मुकेश असीम  आधार से 57 हजार करोड़ और नोटबंदी से 3 लाख करोड़ की बचत के झूठ प्रचार के बाद अब मीडिया और व्हाट्सप्प पर भक्तों का एक नया शिगूफ़ा शुरू हुआ है कि मोदी के दिवालिया कानून वाले मास्टरस्ट्रोक से डरकर 2100 कंपनियों ने 83 हजार करोड़ के कर्ज वापस कर दिये हैं। इसमें टाटा द्वारा भूषण स्टील की खरीद से प्राप्त 35 हजार करोड़ और उत्तम गालवा के लिए मित्तल से प्राप्त 7 हजार करोड़ की विशेष चर्चा है। यह इस गलत समझ पर आधारित है कि पहले कोई डूबा कर्ज वापस नहीं होता थ ा, जबकि पहले भी कुछ मामलों में बैंक द्वारा बकाया ब्याज और मूल रकम में बड़ी छूट की राहत दिये जाने पर कर्जदार एकमुश्त समझौता (One Time Settlement) कर शेष रकम वापस करते आए हैं या दिवालिया कंपनी की बिक्री से कर्ज की रकम का एक हिस्सा वापस होने के मामले होते थे। भूषण स्टील का मामला लेते हैं - इस पर 56 हजार करोड़ का कर्ज था जिसमें ना जोड़ा गया कुछ सालों का ब्याज जोड़ दें तो यह रकम और भी बड़ी हो जाती है। अब टाटा को यह कंपनी 35 हजार करोड़ में पूर्ण...

स्‍टरलाइट कम्‍पनी के मुनाफे के लिए तमिलनाडु में 11 लोगों की पुलिसिया हत्‍या

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स्‍टरलाइट कम्‍पनी के मुनाफे के लिए तमिलनाडु में 11 लोगों की पुलिसिया हत्‍या  गिरीश मालवीय तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता कंपनी की स्टरलाइट कॉपर यूनिट के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में कल 11 लोगों की मौत हो गयी , इस घटना को लेकर राष्ट्रीय मीडिया में एक अजीब सी चुप्पी देखी जा रही है क्योकि उलझी हुई इस पूरी कहानी के सिरे जब खुलना शुरू होंगे तो बड़े और नामचीन लोगो के चेहरे से नक़ाब सबसे पहले उतरना शुरू होंगे क्योंकि देश के जिस राज्य में भी अपार खनिज संपदा है वहाँ वहाँ एक तूतीकोरिन मौजूद है स्टरलाइट जैसी तमाम अपराध कथाओं से देश पटा पड़ा है लेकिन पूंजीवाद की गुलाम मीडिया यह कहानी सुनाना नही चाहती आपने अडानी का बहुत नाम सुना होगा अम्बानी का भी बहुत नाम सुना होगा लेकिन जितने बड़े ये ग्रुप हैं लगभग उतनी ही बड़ी एक कम्पनी है वेदांता रिसोर्सेज जिसके मालिक अनिल अग्रवाल है , वेदांता मूल रूप से विदेशी कंपनी ही है अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता समूह कर्ज के मामले में भारत मे दूसरे नंबर पर आता है. वेदांता पर 1.03 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हैं विभिन्न देशों के कानून और पर्यावरण नियमों का बड़े...

फासीवाद पर दो बेहद प्रासंगिक कविताएं Two relevant poems on fascism

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फासीवाद पर दो बेहद प्रासंगिक कविताएं 1. तुम्हें चुनना होगा (गौहर रजा)  जिन्होंने नफरत फैलाई , कत्ल किए और खुद खत्म हो गए , नफरत से याद किए जाते हैं। जिन्होंने मुहब्बत का सबक दिया और कदम बढ़ाए , वो जिंदा हैं , मुहब्बत से याद किए जाते हैं। जिन्होंने सही वक्त का इंतज़ार किया और शक करते रहे , वे आखिर तक हाथ पर हाथ धरे बैठे थे , शक के कमजोर किलों में क़ातिलों का इंतज़ार उनकी किस्मत बन गया। रास्ते अलग-अलग और साफ हैं। तुम्हें चुनना होगा नफरत , शक और मुहब्बत के बीच। तुम्हारी आवाज़ बुलंद और साफ होनी चाहिए , और कदम सही दिशा में। 2. एस.ए. *   सैनिक का गीत ( बेर्टोल्ट ब्रेष्ट) भूख से बेहाल मैं सो गया लिये पेट में दर्द। कि तभी सुनाई पड़ी आवाज़ें उठ , जर्मनी जाग! फिर दिखी लोगों की भीड़ मार्च करते हुएः थर्ड राइख़ **  की ओर , उन्हें कहते सुना मैंने। मैंने सोचा मेरे पास जीने को कुछ है नहीं तो मैं भी क्यों न चल दूँ इनके साथ। और मार्च करते हुए मेरे साथ था शामिल जो था उनमें सबसे मोटा और जब मैं चिल्लाया ‘र...

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की कविता छात्रों के प्रति Bertolt Brecht's Poem To The Students

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बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की कविता छात्रों के प्रति  Bertolt Brecht's Poem  To The Students    छात्रों के प्रति तुम वहाँ बैठते हो पढ़ने के लिए। और कितना खून बहा था कि तुम वहाँ बैठ सको। क्या ऐसी कहानियाँ तुम्हें बोर करती हैं ? लेकिन मत भूलो कि पहले दूसरे बैठते थे तुम्हारी जगह जो बैठ जाते थे बाद में जनता की छाती पर। होश में आओ! तुम्हारा विज्ञान व्यर्थ होगा , तुम्हारे लिए और अध्ययन बांझ , अगर पढ़ते रहे बिना समर्पित किए अपनी बुद्धि को लड़ने के लिए सारी मानवता के सारे शत्रुओं के विरुद्ध मत भूलो , कि आहत हुए थे तुम जैसे आदमी कि पढ़ सको तुम यहाँ , न कि दुसरे कोई और अब मत मूंदों अपनी आँखें , और मत छोड़ो पढ़ाई बल्कि पढ़ने के लिए पढ़ो और पढ़ने की कोशिश करो कि क्यों पढ़ना है ? To The Students Bertolt Brecht (1898-1956, A German Revolutionary Poet, playwright and theatre director) So there you sit. And how much blood was shed That you might sit there! Do such stories bore you? Well, don't forget that others sat before you who later sat on people....

भीष्म साहनी की कहानी चीफ की दावत Bhisham Sahni's story Chief ki Dawat

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भीष्म साहनी की कहानी चीफ की दावत   आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने , उलझे हुए बालों का जूड़ा बनाए मुँह पर फैली हुई सुर्खी और पाउड़र को मले और मिस्टर शामनाथ सिगरेट पर सिगरेट फूँकते हुए चीजों की फेहरिस्त हाथ में थामे , एक कमरे से दूसरे कमरे में आ-जा रहे थे। आखिर पाँच बजते-बजते तैयारी मुकम्मल होने लगी। कुर्सियाँ , मेज , तिपाइयाँ , नैपकिन , फूल , सब बरामदे में पहुँच गए। ड्रिंक का इंतजाम बैठक में कर दिया गया। अब घर का फालतू सामान अलमारियों के पीछे और पलंगों के नीचे छिपाया जाने लगा। तभी शामनाथ के सामने सहसा एक अड़चन खड़ी हो गई , माँ का क्या होगा ? इस बात की ओर न उनका और न उनकी कुशल गृहिणी का ध्यान गया था। मिस्टर शामनाथ , श्रीमती की ओर घूम कर अंग्रेजी में बोले - ' माँ का क्या होगा ?' श्रीमती काम करते-करते ठहर गईं , और थोडी देर तक सोचने के बाद बोलीं - ' इन्हें पिछवाड़े इनकी सहेली के घर भेज दो , रात-भर बेशक वहीं रहें। कल आ जाएँ। ' शामनाथ सिगरेट मु...