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लुगदी साहित्य : कुछ बातें

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लुगदी साहित्य : कुछ बातें कात्यायनी फिल्मकार कोस्ता गावरास ने एक बार किसी साक्षात्कार के दौरान कहा था कि हर फिल्म‍ राजनीतिक फिल्म होती है , जिस फिल्म में अजीबोग़रीब हथियार लिए लोग पृथ्वी़ को परग्रहीय प्राणियों के हमले से बचाते होते हैं , वे फिल्में भी राजनीतिक ही होती हैं। बात सही है। अक्सर हम जो घोर अराजनीतिक किस्म की रूमानी या मारधाड़ वाली मसाला फिल्म देखते हैं , वह किसी न किसी रूप में हमारे समय का , या उसके किसी पक्ष का ही रूपक रचती होती है। जाहिर है कि देशकाल के इस रूपक के पीछे सर्जक की एक विशेष वर्ग-दृष्टि होती है और उसे ध्यान में रखकर ही उस रूपक को समझा जा सकता है। चालू मसाला फिल्मोंं की तरह ही , समाज में बड़े पैमाने पर जो चलताऊ , लोकप्रिय साहित्य या लुगदी साहित्य पढ़ा जाता है , वह भी किसी न किसी रूप में सामाजिक यथार्थ को ही परावर्तित करता है। सचेतन तौर पर लेखक कत्तई ऐसा नहीं करता , लेकिन रोमानी , फैमिली ड्रामा टाइप या जासूसी लुगदी साहित्य भी किसी न किसी सामाजिक यथार्थ का ही रूपक होता है , या अपने आप सामाजिक यथार्थ ही वहाँ एक फन्तासी रूप में ढल जाता है। कई बार होता यह है कि...

वैज्ञानिक चेतना और क्रान्तिकारी चेतना

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वैज्ञानिक चेतना और क्रान्तिकारी चेतना कात्यायनी वैज्ञानिक चेतना जबतक केवल प्रकृति विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय रहती है , वह मानव जीवन को लगातार उन्नत करने वाली चीज़ों का आविष्कार करती रहती है। भाप इंजन , रेलवे , आटोमोबाइल , हवाई जहाज , दूरसंचार , कंप्‍यूटर आदि से लेकर जीवन रक्षक दवाओं , दर्द निवारक दवाओं , एण्टीबॉयोटिक्स और अंग प्रत्या‍रोपण तक --- ऐसी अनगिनत चीज़ें और प्रविधियॉं हैं , जिनके बिना आज मानव जीवन की कल्प्ना भी नहीं की जा सकती। वैज्ञानिक चेतना तर्कणा और कारण-कार्य-सम्बन्धों की समझ है जो पर्यवेक्षण , प्रयोग और सत्यापन की प्रक्रिया से पैदा होती है। यह वैज्ञानिक चेतना यदि समाज के कुछ उन्नत तत्वों द्वारा आत्मसात कर ली जाती है और वे उसे व्यावहारिक अहसास और समझ के रूप में जनसमुदाय के मानस में पैठाने में सफल हो जाते हैं तो वह (जन समुदाय) उसे सामाजिक जीवन के दायरे में भी लागू करता है और प्रगति में बाधक , अपने लिए अहितकारी सामाजिक-राजनीतिक ढॉंचे को योजनाबद्ध ढंग से नष्ट करके एक अधिक तर्कसंगत , न्यायसंगत सामाजिक-राजनीतिक ढॉंचे के निर्माण की सरगर्मियों में जुट जाता है। लेकिन यह ...