गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की कहानी - ऐसे ही किसी दिन Story - One of These Days / Gabriel Garcia Marquez
गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की कहानी - ऐसे ही किसी दिन अनुवाद – मनोज पटेल आठ बजे के बाद खिड़की से आसमान को देखने के इरादे से , वह थोड़ी देर के लिए रुका और उसने देखा कि दो विचारमग्न बाज बगल के मकान की शहतीर पर धूप ले रहे थे। वह इस खयाल के साथ फिर काम में जुट गया कि दोपहर के खाने के पहले फिर से बारिश होगी। अपने ग्यारह वर्षीय बेटे की तेज आवाज से उसका ध्यान भंग हुआ।उस सोमवार की सुबह , गर्म और बिना बारिश वाली हुई। तड़के जागने वाले औरेलियो एस्कोवार ने , जो दाँतों का बिना डिग्री वाला डाक्टर था , अपना क्लीनिक छह बजे ही खोल दिया। उसने शीशे की आलमारी से नकली दाँत निकाले , जो अब भी खड़िया-मिट्टी के साँचे में जड़े हुए थे , और मुट्ठी भर औजारों को उनके आकार के क्रम में मेज पर यूँ सजा के रखा जैसे उनकी नुमाइश की जा रही हो। उसने बिना कालर वाली एक धारीदार कमीज पहन रखी थी जिसके बंद गले पर सुनहरा बटन था , और उसकी पैंट गेलिस से बँधी हुई थी। वह दुबला-पतला सींकिया इनसान था जिसकी निगाह कभी-कभार ही हालात के अनुरूप हो पाती थी , जैसा कि बहरे लोगों की निगाहों के मामले में होता है। औजारों को मेज पर ...