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मानवीय जीवन की सार्थकता के बाबत कुछ उद्धरण व कविताएं Some quotes and poems about the purpose of human life

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  मानवीय जीवन की सार्थकता के बाबत कुछ उद्धरण व कविताएं Some quotes and poems about the purpose of human life   आदमी की सबसे प्यारी चीज़ होती है उसकी ज़िन्दगी। उसे जीने के लिए बस एक ही ज़िन्दगी मिलती है, और उसे अपनी ज़िन्दगी को इस तरह जीना चाहिए ताकि उसे कभी इस पछतावे की आग में न जलना पड़े कि उसने अपने साल यूँ ही बर्बाद कर दिये, ताकि उसे एक क्षुद्र और तुच्छ अतीत को लेकर शर्मिन्दा न होना पड़े; उसे इस तरह जीना चाहिए ताकि जब वह मृत्युशैया पर हो, तो वह कह सके – मैंने अपनी सारी ज़िन्दगी, अपनी सारी ताक़त दुनिया के सबसे महान लक्ष्य के लिए, इन्सानियत की मुक्ति के लक्ष्य के लिए लगायी है। और इन्सान को अपनी ज़िन्दगी के एक-एक पल का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि कौन जाने कब अचानक कोई बीमारी या दुर्घटना उसके जीवन की डोर को बीच में ही काट दे। निकोलाई आस्त्रोवस्की Man's dearest possession is life. It is given to him but once, and he must live it so as to feel no torturing regrets for wasted years, never know the burning shame of a mean and petty past; so live that, dying, he might say: all my life, all...

गोर्की के पहले उपन्यास ‘अभागा' की पीडीएफ फाइल PDF file of Maxim Gorky's First Novel - Orphan Paul

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  गोर्की के पहले उपन्यास ‘अभागा' की पीडीएफ फाइल  PDF file of Maxim Gorky's First Novel - Orphan Paul हिन्‍दी पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक   Link for English PDF File - (Translation by Lily Turner and Mark O. Strever) डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 9892808704 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें इस पुस्तक के बारे में ‘अभागा’ मक्सिम गोर्की के एक प्रारम्भिक उपन्यास का हिन्दी अनुवाद है। यह उपन्यास अंग्रेजी में ‘लकलेस पावेल’ या ‘आर्फन पाल’ नाम से विगत शताब्दी के पूर्वार्द्ध में प्रकाशित हुआ था। उसी अंग्रेज़ी अनुवाद से नूर नबी अब्बासी ने यह हिन्दी अनुवाद किया था जो 1954 में नवयुग प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हुआ था। नूर नबी अब्बासी उस दौर के सुप्रसिद्ध अनुवादक थे जिन्होंने मक्सिम गोर्की और हावर्ड फ़ास्ट जैसे कई लेखकों की कृतियों से पाँचवें-छठे दशक में हिन्दी पाठकों को परिचित कराने का महत्त्वपूर्ण काम किया था। जनता की संस्कृति और हिन्दी भाषा की महत्त्वपूर्ण सेवा करने वाले ऐसे लोग आज भुलाये जा चुके हैं, यह अफ़सोस की बात है। इस अनूदित कृति के ऐतिहासिक महत्त्व को ध्यान में रखते हुए, अनुवाद...

कहानी - बुढ़िया इज़रगिल / मक्सिम गोर्की Story - Old Izergil / Maxim Gorky

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कहानी - बुढ़िया इज़रगिल मक्सिम गोर्की For English version please scroll down  1 मैंने ये कहानियाँ बेस्साराबिया में अक्करमन के नज़दीक समुद्र-तट पर सुनी थीं। साँझ का समय था। अंगूर तोड़ने का काम ख़त्म हो चुका था। मोल्दावियावासियों का दल , जिसके साथ मैं अंगूर तोड़ने का काम करता था , समुद्र-तट को चल दिया। मैं और बुढ़िया इजरगिल अंगूरी बेलों की घनी छाँव में चुपचाप लेटे थे और रात के नीले तिमिर में समुद्र-तट की ओर जाते लोगों की परछाइयों को विलीन होते देख रहे थे। वे गाते और हँसते हुए जा रहे थे। साँवले मर्दों की मूँछें घनी और काली थीं , कन्धों तक के बाल घुँघराले थे। वे छोटे कुरते और ढीली-ढाली सलवारें पहने थे। गहरी नीली आँखों और सुघड़-सुडौल बदन वाली प्रसन्न तथा प्रफुल्ल औरतें तथा लड़कियाँ भी सांवली थीं। रेशम-से मुलायम उनके काले बाल लहरा रहे थे , सुहानी हवा उनके बालों के साथ खिलवाड़ कर रही थी और उनमें गुँथे सिक्के आपस में टकराकर झंकार कर रहे थे। हवा की एक प्रशस्त और निर्बाध धारा बह रही थी , लेकिन जब-तब वह मानो किसी अदृश्य चीज़ के ऊपर से ज़ोर की छलांग लगाती , जिससे तेज़ झोंका आता , हवा स्त्रियों के ...