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युद्धोन्माद के बीच जिन्हें वाकई मुल्क की फ़िक्र है, वे ठण्डे दिमाग़ से ये लेख पढ़ें

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युद्धोन्माद के बीच जिन्हें वाकई मुल्क की फ़िक्र है, वे ठण्डे दिमाग़ से ये लेख पढ़ें कविता कृष्‍णपल्‍लवी गाली देने वाले उन्मादी यहाँ कत्तई न आयें। देशभक्ति ज़्यादा ज़ोर मार रही हो तो बाडर पर चले जायें। जिन्हें वाकई मुल्क की फ़िक्र है , वे ठण्डे दिमाग़ से पढ़ें। (1) महीनों पहले लिखा था कि जब सारे वायदों की बखिया उधड़ जायेगी और मँहगाई , बेरोज़गारी , जी.एस.टी. , नोटबंदी , जल-जंगल-ज़मीन की लूट और पूँजीपतियों की देश-हड़प मुहिम से ध्यान हटाना होगा तो , पहले राममंदिर का मसला उछाला जाएगा और फिर युद्धोन्मादी देशभक्ति का प्रेत जगाया जाएगा। (2) सोचिये , उरी और अमरनाथ यात्रियों पर हमला भी चुनावों के ऐन पहले ही हुआ था। इस बार भी ऐसा ही हुआ। फिर याद कीजिए , पुलवामा हमले के अंदेशे की इंटेलिजेंस रिपोर्ट की अनदेखी क्यों की गयी ? अब तो राज ठाकरे जैसा एक छुटभैय्या फासिस्ट भी कह रहा है कि अजित डोभाल से पूछताछ हो तो पुलवामा की सच्चाई सामने आ जायेगी। (3) सीमित युद्ध की ज़रूरत इमरान खान को भी है , क्योंकि उसके सभी पॉपुलिस्ट नारों की हवा चन्द महीनों में ही निकल चुकी है और अवाम उसे सेना की कठपुतली समझता है। ...

शिशुओं के पोषण पर अमेरिकी साम्राज्यवाद की गिद्ध दृष्टि

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शिशुओं के पोषण पर अमेरिकी साम्राज्यवाद की गिद्ध दृष्टि डॉक्‍टर्स फॉर सोसायटी  मुनाफ़ाख़ोर साम्राज्यवादियों के लिए मानवता के स्वास्थ्य के ऊपर वरीयता इनके मुनाफ़े की अंधी हवस रखती है । तभी तो हाल ही में WHO द्वारा जीनेवा में आयोजित विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन में शिशु के लिए स्तनपान को वरीयता और प्रोत्साहन देने हेतु प्रस्ताव जब पटल पर रखा गया तब अमेरिका ने उसे पारित होने से रोकने के लिए नीचता की सारी हदें पार कर दी। विज्ञान में यह एक निर्विवाद रूप से स्थापित सत्य है कि नवजात शिशु के विकास के लिए पहले छह   महीने तक माँ का दूध ही सर्वोत्तम होता है , व इसके विकल्प के रूप में प्रचारित बाज़ार में उपलब्ध कृत्रिम baby-feeds बेचने वाले बहुराष्ट्रीय brands अपने विज्ञापनों में झूठे दावे करके शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण से खिलवाड़ करते हैं। लातिन अमेरिकी देश , इकुएडोर के प्रतिनिधि मंडल ने जब स्तनपान को प्रोत्साहित करने हेतु इन झूठे दावे करके कृत्रिम baby feed बेचने वाले brands पर नकेल कसने का प्रस्ताव रखा तो अमेरिका को अपने देश के उन मुनाफ़ाख़ोर brands का हित याद आ गया जिनके मुनाफ़े प...