क्रान्तिकारी कवि धूमिल की दस कविताएं
क्रान्तिकारी कवि धूमिल ( 09 नवम्बर 1936 - 10 फरवरी 1975) की दस कविताएं धूमिल की रचनाओं के तेवर का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी एक कविता मोचीराम को पाठ्यक्रम से हटवाने के लिए राष् ट्रीय फासीवाद पार्टी भाजपा ने संसद में ताकत आजमाइश की थी। _____________1 ⃣ _____________ रोटी और संसद एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है , न रोटी खाता है वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है मैं पूछता हूँ-- ' यह तीसरा आदमी कौन है ?' मेरे देश की संसद मौन है। _____________2 ⃣ _____________ विद्रोह ’ ठीक है , यदि कुछ नहीं तो विद्रोह ही सही’ — हँसमुख बनिए ने कहा — ’ मेरे पास उसका भी बाज़ार है’ मगर आज दुकान बन्द है , कल आना आज इतवार है। मैं ले लूँगा। इसे मंच दूँगा और तुम्हारा विद्रोह मंच पाते ही समारोह बन जाएगा फिर कोई सिरफिर शौक़ीन विदेशी ग्राहक आएगा। मैं इसे मुँहमाँगी क़ीमत पर बेचूँगा। _____________3 ⃣ _____________ धूमिल की अन्तिम कविता शब्द किस तरह कविता बनत...