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मार्क्‍सवाद की महत्‍वपूर्ण कृति ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की पीडीएफ फाइल PDF file of important writing of Marxism 'Anti-Duhring'

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मार्क्‍सवाद की महत्‍वपूर्ण कृति ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की पीडीएफ फाइल PDF file of important writing of Marxism 'Anti-Duhring' हिन्‍दी पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक   Link for English PDF File डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 9892808704 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें For English preface please scroll down  प्रकाशक की ओर से एंगेल्स ने ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की रचना 1876 - 1878 के दौरान की। वह पूंजीवाद के तीव्र किंतु अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण विकास का काल था। इसके साथ ही उस समय तक पूंजीवादी उत्पादन का विकास अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया था। 1873 के विश्व आर्थिक संकट के कारण इजारेदारी संघों का तीव्र और व्यापक विकास हुआ। वह इजारेदारी-पूर्व पूंजीवाद से इजारेदारी पूंजीवाद में संक्रमण काल की शुरूआत थी , जो बीसवीं सदी के प्रारंभ में समाप्त हुआ। विश्व इतिहास में बुनियादी महत्व की घटना , जिसने सर्वहारा वर्ग के मुक्ति संघर्ष में एक नये दौर का सूत्रपात किया , पेरिस कम्यून (1871 ) था। सर्वहारा अधिनायकत्व स्थापित करने के इस प्रथम प्रयास के अनुभव ने यह सिद्ध कर दिया कि सर्वहारा क्...

विविध उद्धरण

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विविध उद्धरण मैं तुम्हें बु ‍ द्धिमत्ता की लड़ाई के लिए ललकारता लेकिन मैं देख रहा हूं कि तुम निहत्थे हो। ✍   विलियम शेक्सपीयर ________________________ बिना किसी अपवाद के , और बिना किसी की भावनाओं का ख़याल किए , सभी चीज़ों का परीक्षण होना चाहिए , उनपर बहस होनी चाहिए और उनकी जाँच-पड़ताल होनी चाहिए | ✍   देनी दिदेरो ( प्रबोधनकालीन फ्रांसीसी दार्शनिक ) ________________________ तर्कणा हमेशा मौजूद रही है , लेकिन हमेशा तर्कसंगत रूप में नहीं। ✍   कार्ल मार्क्स ________________________ किसी भी चीज़ को महज विश् ‍ वास पर स् ‍ वीकार करना , आलोचनात् ‍ मक अमल और विकास का प्रतिषेध करना एक दारुण अपराध है। ✍   लेनिन ________________________ मनुष्य कठिन प्रयास करते हुए मगरमच्छ की दंतपंक्ति के बीच से मणि बाहर ला सकता है , वह उठती-गिरती लहरों से व्याप्त समुद्र को तैरकर पार कर सकता है , क्रुद्ध सर्प को फूलों की भांति सिर पर धारण कर सकता है , किंतु दुराग्रह से ग्रस्त मूर्ख व्यक्ति को अपनी बातों से संतुष्ट नहीं कर सकता है । ( भर्तृहरि विरचित नीतिशतकम् , श्...

धर्म के प्रश्‍न पर मार्क्‍सवादी अवस्थिति

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धर्म के प्रश्‍न पर मार्क्‍सवादी अवस्थिति धर्म को एक व्‍यक्तिगत मामला घोषित कर दिया जाना चाहिएा समाजवादी अक्‍सर धर्म के प्रति अपने दृष्टिकोण को इन्‍हीं शब्‍दों में व्‍यक्‍त करते हैं। किन्‍तु किसी प्रकार की गलतफहमी न हो इसलिए आवश्‍यक है कि इन शब्‍दों के अर्थ की बिल्‍कुल ठीक-ठाक व्‍याख्‍या कर दी जाय। हम माँग करते हैं कि जहां तक राज्‍य का सम्‍बन्‍ध है , उसे धर्म को एक व्‍यक्तिगत चीज़ मानना चाहिए। किन्‍तु जहां तक हमारी पार्टी का सम्‍बन्‍ध है , धर्म को हम किसी भी प्रकार से एक व्‍यक्तिगत मामला नहीं मान सकते। धर्म से राज्‍य का कोई भी सम्‍बन्‍ध नहीं होना चाहिए और धामिर्क सोसाइटियों का भी सरकार की सत्‍ता से कोई सरोकार नहीं रहना चाहिए। प्रत्‍येक व्‍यक्ति को पूर्ण स्‍वतंत्रता होनी चाहिए कि वह चाहे जिस धर्म को माने , या चाहे तो किसी धर्म को न माने , अर्थात नास्तिक हो , जो आम तौर से , हर समाजवादी होता है। नागरिकों के साथ धामिर्क विश्‍वासों के आधार पर भेदभाव किया जाना सर्वथा असहनीय है। सरकारी कागजों में तो नागरिक के धर्म का उल्‍लेख भी निस्‍सन्‍देह समाप्‍त कर दिया जाना चाहिए। स्‍थापित चर्च को क...