केदारनाथ अग्रवाल की आठ कविताएँ
केदारनाथ अग्रवाल की आठ कविताएँ ( एक) जीवन की धूल जो जीवन की धूल चाटकर बड़ा हुआ है , तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है , जिसने सोने को खोदा , लोहा मोड़ा है , जो रवि के रथ का घोड़ा है , वह जन मारे नहीं मरेगा , नहीं मरेगा। जो जीवन की आग जलाकर आग बना है फ़ौलादी पंजे फैलाये नाग बना है जिसने शोषण को तोड़ा , शासन मोड़ा है , जो युग के रथ का घोड़ा है वह जन मारे नहीं मरेगा , नहीं मरेगा।। ________________________ ( दो) आग लगे इस रामराज में आग लगे इस रामराज में ढोलक मढ़ती है अमीर की चमड़ी बजती है ग़रीब की ख़ून बहा है रामराज में आग लगे इस रामराज में आग लगे इस रामराज में रोटी रूठी , कौर छिना है थाली सूनी , अन्न बिना है पेट धँसा है रामराज में आग लगे इस रामराज में। १८ सितम्बर १९५१ ________________________ ( तीन) मजदूर का जन्म एक हथौड़ेवाला घर में और हुआ! हाथी सा बलवान , जहाज़ी हाथों वाला और हुआ! सूरज-सा इंसान , तरेरी आँखों वाला और हुआ!! एक हथौड़ेवाला घर में और हुआ! मात...