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आज के दौर में नौजवानों से चंद बातें ...

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आज के दौर में नौजवानों से चंद बातें ... कविता कृष्णपल्लवी ये बातें "बुद्धि" और व्यावहारिकता के अपच-गैस से पीड़ित लोगों , या महज "वाद-विवाद-संवाद" का आनंद लेने वाले ' खलिहर ' निठल्लों या बाल की खाल निकाल कर ढोलक छवाने वाले गुणी जनों के लिए नहीं हैं। घोंसलावादी "सद्गृहस्थों" के लिए भी नहीं हैं। अगर आप थोड़ा लीक से हटकर चलने के बारे में सोचते हैं , अगर आप दुनिया बदलने के सपने और परियोजना के बारे में कुछ सोचते-विचारते हैं , अगर आपकी आत्मा यथास्थिति के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए बीच-बीच में तड़प उठती है , अगर आपके दिल में आम मेहनतक़श अवाम के जीवन , सपनों , संघर्षों और मिशन के साथ एकरूप हो जाने का काव्यात्मक विचार कभी-कभी आता हो और यह लगता हो कि आपके कलेजे में इतना दम है , तभी यह टिप्पणी पढ़िएगा। अन्यथा रहने ही दीजिएगा। आपसे न हो सकेगा। कल , यानी 5 मई को , कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। नई सदी में विश्व पूँजीवाद दीर्घकालिक मंदी और ठहराव की जिस दुश्चक्रीय निराशा से गुज़र रहा है , उसने सिद्ध कर दिया है कि मार्क्स की ऐतिहासिक भविष्यवाणी सही थी I मार्क्स...

मानवीय जीवन की सार्थकता के बाबत कुछ उद्धरण व कविताएं Some quotes and poems about the purpose of human life

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  मानवीय जीवन की सार्थकता के बाबत कुछ उद्धरण व कविताएं Some quotes and poems about the purpose of human life   आदमी की सबसे प्यारी चीज़ होती है उसकी ज़िन्दगी। उसे जीने के लिए बस एक ही ज़िन्दगी मिलती है, और उसे अपनी ज़िन्दगी को इस तरह जीना चाहिए ताकि उसे कभी इस पछतावे की आग में न जलना पड़े कि उसने अपने साल यूँ ही बर्बाद कर दिये, ताकि उसे एक क्षुद्र और तुच्छ अतीत को लेकर शर्मिन्दा न होना पड़े; उसे इस तरह जीना चाहिए ताकि जब वह मृत्युशैया पर हो, तो वह कह सके – मैंने अपनी सारी ज़िन्दगी, अपनी सारी ताक़त दुनिया के सबसे महान लक्ष्य के लिए, इन्सानियत की मुक्ति के लक्ष्य के लिए लगायी है। और इन्सान को अपनी ज़िन्दगी के एक-एक पल का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि कौन जाने कब अचानक कोई बीमारी या दुर्घटना उसके जीवन की डोर को बीच में ही काट दे। निकोलाई आस्त्रोवस्की Man's dearest possession is life. It is given to him but once, and he must live it so as to feel no torturing regrets for wasted years, never know the burning shame of a mean and petty past; so live that, dying, he might say: all my life, all...

मार्क्‍सवाद की महत्‍वपूर्ण कृति ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की पीडीएफ फाइल PDF file of important writing of Marxism 'Anti-Duhring'

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मार्क्‍सवाद की महत्‍वपूर्ण कृति ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की पीडीएफ फाइल PDF file of important writing of Marxism 'Anti-Duhring' हिन्‍दी पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक   Link for English PDF File डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 9892808704 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें For English preface please scroll down  प्रकाशक की ओर से एंगेल्स ने ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की रचना 1876 - 1878 के दौरान की। वह पूंजीवाद के तीव्र किंतु अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण विकास का काल था। इसके साथ ही उस समय तक पूंजीवादी उत्पादन का विकास अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया था। 1873 के विश्व आर्थिक संकट के कारण इजारेदारी संघों का तीव्र और व्यापक विकास हुआ। वह इजारेदारी-पूर्व पूंजीवाद से इजारेदारी पूंजीवाद में संक्रमण काल की शुरूआत थी , जो बीसवीं सदी के प्रारंभ में समाप्त हुआ। विश्व इतिहास में बुनियादी महत्व की घटना , जिसने सर्वहारा वर्ग के मुक्ति संघर्ष में एक नये दौर का सूत्रपात किया , पेरिस कम्यून (1871 ) था। सर्वहारा अधिनायकत्व स्थापित करने के इस प्रथम प्रयास के अनुभव ने यह सिद्ध कर दिया कि सर्वहारा क्...