आज के दौर में नौजवानों से चंद बातें ...
आज के दौर में नौजवानों से चंद बातें ... कविता कृष्णपल्लवी ये बातें "बुद्धि" और व्यावहारिकता के अपच-गैस से पीड़ित लोगों , या महज "वाद-विवाद-संवाद" का आनंद लेने वाले ' खलिहर ' निठल्लों या बाल की खाल निकाल कर ढोलक छवाने वाले गुणी जनों के लिए नहीं हैं। घोंसलावादी "सद्गृहस्थों" के लिए भी नहीं हैं। अगर आप थोड़ा लीक से हटकर चलने के बारे में सोचते हैं , अगर आप दुनिया बदलने के सपने और परियोजना के बारे में कुछ सोचते-विचारते हैं , अगर आपकी आत्मा यथास्थिति के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए बीच-बीच में तड़प उठती है , अगर आपके दिल में आम मेहनतक़श अवाम के जीवन , सपनों , संघर्षों और मिशन के साथ एकरूप हो जाने का काव्यात्मक विचार कभी-कभी आता हो और यह लगता हो कि आपके कलेजे में इतना दम है , तभी यह टिप्पणी पढ़िएगा। अन्यथा रहने ही दीजिएगा। आपसे न हो सकेगा। कल , यानी 5 मई को , कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। नई सदी में विश्व पूँजीवाद दीर्घकालिक मंदी और ठहराव की जिस दुश्चक्रीय निराशा से गुज़र रहा है , उसने सिद्ध कर दिया है कि मार्क्स की ऐतिहासिक भविष्यवाणी सही थी I मार्क्स...