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बिटकॉइन और क्रिप्‍टोकरेंसी: संकटग्रस्‍त पूँजीवाद के भीतर लोभ-लालच, सट्टेबाज़ी और अपराध को बढ़ावा देने के नये औजार

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  बिटकॉइन और क्रिप्‍टोकरेंसी: संकटग्रस्‍त पूँजीवाद के भीतर लोभ-लालच, सट्टेबाज़ी और अपराध को बढ़ावा देने के नये औजार आनन्‍द सिंह  हाल के वर्षों में भारत सहित दुनिया के कई हिस्‍सों में खाते-पीते लोगों के बीच बिटकॉइन और अन्‍य क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करके पैसे से पैसा बनाने की एक नयी सनक पैदा हुई है। इस सनक को बढ़ावा देने का काम इण्‍टरनेट, सोशल मीडिया और मुख्‍यधारा की मीडिया पर प्रसारित होने वाले विज्ञापनों ने किया है जिनमें  लोगों को बिना मेहनत किये रातों-रात अमीर बन जाने के सब्‍ज़बाग़ दिखाये जाते हैं। इन विज्ञापनों में लोगों को बताया जाता है कि क्रिप्‍टोकरेंसी में निवेश करके वे बैंक और शेयर बाज़ार में किये गये निवेश के मुक़ाबले कई गुना ज्‍़यादा पैसा बना सकते हैं। ऐसे में ताज्‍जुब की बात नहीं है कि हाल के वर्षों में दुनिया के तमाम देशों की ही तरह भारत के खाते-पीते लोगों ने इस देश के मज़दूरों के निर्मम शोषण से जमा की गयी पूँजी को क्रिप्‍टोकरेंसी में जमकर निवेश किया है। इस प्रक्रिया में कुछ लोगों ने ख़ूब पैसे कमाये भी हैं जिसकी वजह से अन्‍य लोगों को यह उम्‍मीद रहती है कि उनके...

"वामपंथी" पत्रकार महोदय का "शोध" और रोष भरा प्रतिवाद : यानी मूर्खता के साथ क्रोध के सम्मिश्रण से उपजा विकट-विचित्र रासायनिक यौगिक

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"वामपंथी" पत्रकार महोदय का "शोध" और रोष भरा प्रतिवाद : यानी मूर्खता के साथ क्रोध के सम्मिश्रण से उपजा विकट-विचित्र रासायनिक यौगिक कविता कृष्‍णपल्लवी मूर्खेश असीम जी नाराज़ हो गये हैं! बेचारे ने रातभर ‘मज़दूर बिगुल’ की फाइलें खंगाली हैं,कि अपनी वर्तमान मूर्खता को सही सिद्ध करने का कोई रास्ता अतीत में मिल जाए! अन्त में, उन्होंने ‘मज़दूर बिगुल’ के चार वर्ष पुराने एक सम्पादकीय को काफी पुरातात्विक खनन के बाद निकाला है और उसे उद्धृत करके दावा किया है, कि हमने भी तो यह लिखा था कि व्यापारिक पूंजी की कालाबाज़ारी, सट्टेबाज़ी आदि के कारण कीमतें बढ़ती हैं! खुदरा व्यापार व कृषि उपज के बाज़ार के दरवाज़े इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त कम्पनियों के लिए खोल दिये जाने के कारण भोजन समेत सभी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी होती है! इसमें एक बड़े पूंजीपति घराने अदानी द्वारा किया गया घोटाला भी शामिल है! फिर मूर्खेश जी पूछते हैं कि हमने जब ये बातें लिखीं थीं तब वह सही थीं और जब वह कह रहे हैं, तो वे ग़लत हो गयीं! अब हम कारपोरेट पूंजी की आलोचना पर नाराज़ क्यों हो रहे हैं? यही तो समस्या...

महँगाई के मार्क्सवादी विश्‍लेषण के बाबत सोशल मीडिया के "वामपंथी" पत्रकार महोदय के मूर्खतापूर्ण कुतर्क

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'यूरेका! यूरेका!' -- सोशल मीडिया के "वामपंथी" पत्रकार महोदय ने फिर चमत्कृत कर दिया अपनी नयी खोज से!! कविता कृष्‍णपल्लवी सोशल मीडिया के ‘’वामपंथी’’ पत्रकार महोदय फिर से एक नयी खोज लेकर आए हैं। उन्होंने बताया है कि अप्रैल में कुल थोक महँगाई बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो गयी है। उनका दावा है कि यह महँगाई इजारेदार पूँजी द्वारा वसूले जाने वाले ट्रिब्यूट (इजारेदार लगान) और अप्रत्यक्ष करों के बढ़ने के कारण बढ़ी है। इसके बाद उन्होंने इशारतन हम पर हमला करते हुए दावा किया है कि हम इजारेदार पूँजी के आने से खाद्यान्न के सस्ते होने का इन्तज़ार कर रहे हैं! पूरे मसले की अवसरवादी प्रस्तुति कर ऐसे “बौद्धिक” बहुरूपिये अपने मूर्खतापूर्ण कुतर्कों को सही साबित करने का प्रयास करते हैं। तो आइये जाने लेते हैं कि मूर्खेश असीम ने यहाँ क्या द्रविड़ प्राणायाम किये हैं। 1. 10.5 प्रतिशत महँगाई केवल खाद्यान्न की महँगाई नहीं है। कुछ खाद्य वस्तुओं की थोक महँगाई मार्च से अप्रैल में 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.9 प्रतिशत हो गयी, लेकिन उनकी खुदरा महँगाई घटी है, जिस पर कुछ आगे आऊँगी। लेकिन यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह ...

जियो को फायदा पहुँचाने के लिए बीएसएनएल को मोदी सरकार में किस तरह से बर्बाद किया गया, जानें।

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बीएसएनएल को मोदी सरकार में किस तरह से बर्बाद किया गया गिरीश मालवीय  यह बात सभी को पता है कि किस तरह से 4g स्पेक्ट्रम BSNL को न देकर बाकी सब कंपनियों को दिया गया। मोदी सरकार की मंशा जियो को प्रमोट करने की थी और उसी को आगे बढाने के लिए बीएसएनएल को धीमा जहर दिया गया। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रिलायंस को सिर्फ डेटा सर्विस के लिए लाइसेंस दिया गया था, लेकिन बाद में 40 हजार करोड़ रुपये की फीस की बजाय 1,600 करोड़ रुपये में ही वॉयस सर्विस का लाइसेंस दे दिया गया, लेकिन जियो के पास इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव था और यही से मोदी सरकार ने बीएसएनएल के इंफ्रास्ट्रक्चर को धीरे धीरे जिओ को देना शुरू किया। 2014 में आते ही मोदी सरकार द्वारा एक टॉवर पॉलिसी की घोषणा की गयी और दबाव डालकर रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड से भारत संचार निगम लिमिटेड के साथ मास्‍टर शेयरिंग समझौता करवा दिया। इस समझौते के तहत रिलायंस जिओ बीएसएनएल के देशभर में मौजूद 62,000 टॉवर्स का उपयोग कर सकती थी। इनमें से 50,000 में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध थी। यह जियो के लिए संजीवनी मिलने जैसा था क्योंकि वह चाहे कितना भी प...

देश के आधे एटीएम बन्द होने का भाजपाई उद्योगपति कनेक्शन

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देश के आधे एटीएम बन्द होने का भाजपाई उद्योगपति कनेक्शन गिरीश मालवीय कृपया पूरा पढ़े .......कुछ दिन पहले एक खबर आई थी कि देश भर के आधे एटीएम बन्द होने वाले है दरअसल एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े संगठन सीएटीएमआई के हवाले से ये बात कही गयी थी संगठन ने इसकी वजह नियमों में हुए बदलाव को बताया , जिसके चलते एटीएम ऑपरेट करना आसान नहीं रह गया है सीएटीएमआई के डायरेक्टर वी बालासुब्रमण्यन के अनुसार अप्रैल 2018 में आरबीआई ने एटीएम सर्विस प्रोवाइडर और उनके कॉन्ट्रैक्टर पर सख्त नियम लागू कर दिए थे , इन नियमों के अनुसार एटीएम सर्विस प्रोवाइडर की कुल संपत्ति कम से कम 100 करोड़ रुपए होनी जरूरी है। उसके पास 300 कैश वैन का बेड़ा होना अनिवार्य है। हर वैन में दो संरक्षक और दो बंदूकधारी गार्ड और एक ड्राइवर तैनात करना होगा। हर कैश वैन जीपीएस और सीसीटीवी से लैस होनी चाहिए। इसके अलावा सभी एटीएम का सॉफ्टवेयर विंडोज एक्सपी से विंडोज 10 में अपग्रेड होना चाहिए इसके अलावा सुरक्षा मानकों को ध्यान मे रखते हुए ओर भी नियम बनाए गए हैं अब इन नियमों को पढ़ कर आपको भी एक बार ऐसा लगेगा कि इसमें क्या गलत है सारे नियम...

राफ़ेल घोटाला - फ्रांस के राष्‍ट्रपति ओलांदे ने खोल दी मोदी-अंबानी पार्टनरशिप की पोल

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राफ़ेल घोटाला - फ्रांस के राष्‍ट्रपति ओलांदे ने खोल दी मोदी-अंबानी पार्टनरशिप की पोल  सत्‍यम वर्मा  राफ़ेल घोटाला भारत ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। इससे कहीं कम बड़े मामलों में जापान , कोरिया सहित कई देशों में सरकारें गिर चुकी हैं और प्रधानमंत्री और राष्‍ट्रपति को जेल जाना पड़ा है। इस मामले में भ्रष्‍टाचार के इतने सारे साक्ष्‍य पहले ही आ चुके थे कि शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी , और मोदी सरकार द्वारा किए सौदे के समय फ्रांस के राष्‍ट्रपति रहे ओलांदे का बयान आ जाने के बाद तो मोदी सरकार के झूठ को ढंक रही लंगोट की आख़िरी चिन्‍दी भी उड़ गई है। लेकिन गोयबेल्‍स को भी मात देने वाले अंदाज़ में टीवी चैनलों से इसकी चर्चा ग़ायब है , सरकार का कोई छुटभैया कह रहा है कि मामले की ‘’जाँच’’ कराई जाएगी , सरगना चुप साधे हुए है और सारे हंगामे को ढँक देने वाला कोई नया भावनात्‍मक मुद्दा उभारने की योजना बनाने में अपने सिपहसालारों के साथ व्‍यस्‍त है। विपक्षी बुर्जुआ पार्टियाँ ट्विटर पर व्‍यंग्‍यबाण छोड़ने से आगे बढ़ने की कूवत खो चुकी हैं। न तो उनके पास जुझारू कार्यकर्...

गहराता बैंकिंग संकट और आने वाले आर्थिक संकट की आहट

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गहराता बैंकिंग संकट और आने वाले आर्थिक संकट की आहट  मुकेश असीम  देश में इस समय भयंकर आर्थिक संकट चल रहा है और उसकी एक निशानी है - विभिन्न बैंकों का लगातार मर्जर। पहले एसबीआई के 5 सहायक बैंकों की हालत खराब होने पर उनको एसबीआई में मर्ज किया गया। अब तीन बैंकों का फिर मर्जर किया गया है ताकि सबसे कमजोर बैंक देना को बचाया जा सके। आगे आने वाले समय में यह संकट और गहराएगा। बैंकिंग सेक्टर के इस संकट पर हम आज साथी मुकेश असीम की कुछ पोस्ट शेयर कर रहे हैं जो इस मुद्दे के बेहद गंभीर पहलुओं पर हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं। उनकी पांच पोस्ट को मिलाकर यह पोस्ट बनाई है। यह पूरी पोस्ट पढ़ें और जाने कि यह संकट क्यों आ रहा है। _________________________ बैंकिंग इतिहास के कुछ तथ्य 1990 के दशक में जापानी बैंक दुनिया में छाए थे , शीर्ष 10 में से 6-7; फिर जो संकट आया आज तक कहीं दिखाई न देते। फिर अमेरिकन बैंक ऊपर आए , सिटी बैंक नं 1 पर ; 2002 के संकट में ये भी डूबे , सिटी बैंक के टुकड़े करने पड़े। इसके बाद यूरोप के बैंक छाए , पर 2008 के वित्तीय संकट के बाद यूरोप की मेहनतकश जनता का पे...