कविता - ख़ौफ़ से आज़ादी / रवीन्द्रनाथ ठाकुर Poem - Freedom from Fear / Rabindranath Thakur
कविता - ख़ौफ़ से आज़ादी रवीन्द्रनाथ ठाकुर ( बांग्ला से अनुवाद : तनुज) ख़ौफ़ से आज़ादी ही हमारी सच्ची आज़ादी है, जिस पर मैं तुम्हारे लिए दावा ठोंकता हूँ मेरी मातृभूमि! पीढ़ियों के बोझ से आज़ादी, अपना सिर झुका कर चलते रहना, अपनी कमर की हड्डियाँ तोड़ लेना और भविष्य की पुकार पर मूंद लेना अपनी आँखों को! नींद की बेड़ियों से चाहिए हमें आज़ादी जिससे तुम रात के सन्नाटे में ख़ुद को जकड़ लेते हो, और उस सितारे पर ज़ाहिर करते हो अपना अविश्वास जो सत्य की साहसिक राहों तक हमें ले जाना चाहता है.. आज़ादी अपनी क़िस्मत की अराजकता से.. जिसकी पालें अंधी और अनिश्चित हवाओं के सामने कमजोर पड़ती जाती हैं, और पतवार हमेशा चला जाता है मौत के माफ़िक कठोर और ठंडे हाथों में.. कठपुतलियों की इस दुनिया में रहने के अपमान से आज़ादी, जहाँ हरकतें बद-दिमाग़ तंत्रिकाओं के ज़रिए शुरू होती हैं, नासमझ आदतों के द्वारा वे दोहराई जाती हैं, और आकृतियाँ धीरज और आज्ञाकारिता के साथ खेल के मालिक की प्रतीक्षा करती हैं, जिंदगी को किसी बदसूरत नकल में बदल डालने के लिए... Poem - Freedom from Fear Rabindranath Thakur Freedom from fear is the freedom I cla...