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कविता - ख़ौफ़ से आज़ादी / रवीन्द्रनाथ ठाकुर Poem - Freedom from Fear / Rabindranath Thakur

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कविता - ख़ौफ़ से आज़ादी रवीन्द्रनाथ ठाकुर ( बांग्ला से अनुवाद : तनुज) ख़ौफ़ से आज़ादी ही हमारी सच्ची आज़ादी है, जिस पर मैं तुम्हारे लिए दावा ठोंकता हूँ मेरी मातृभूमि! पीढ़ियों के बोझ से आज़ादी, अपना सिर झुका कर चलते रहना, अपनी कमर की हड्डियाँ तोड़ लेना और भविष्य की पुकार पर मूंद लेना अपनी आँखों को! नींद की बेड़ियों से चाहिए हमें आज़ादी जिससे तुम रात के सन्नाटे में ख़ुद को जकड़ लेते हो, और उस सितारे पर ज़ाहिर करते हो अपना अविश्वास जो सत्य की साहसिक राहों तक हमें ले जाना चाहता है.. आज़ादी अपनी क़िस्मत की अराजकता से.. जिसकी पालें अंधी और अनिश्चित हवाओं के सामने कमजोर पड़ती जाती हैं, और पतवार हमेशा चला जाता है मौत के माफ़िक कठोर और ठंडे हाथों में.. कठपुतलियों की इस दुनिया में रहने के अपमान से आज़ादी, जहाँ हरकतें बद-दिमाग़ तंत्रिकाओं के ज़रिए शुरू होती हैं, नासमझ आदतों के द्वारा वे दोहराई जाती हैं, और आकृतियाँ धीरज और आज्ञाकारिता के साथ खेल के मालिक की प्रतीक्षा करती हैं, जिंदगी को किसी बदसूरत नकल में बदल डालने के लिए... Poem - Freedom from Fear  Rabindranath Thakur Freedom from fear is the freedom I cla...

रबीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी तोता Story - The Parrot's Training / Rabindranath Tagore

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  रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी तोता 1 एक था तोता। वह बड़ा मूर्ख था। गाता तो था , पर शास्त्र नही पढ़ता था। उछलता था , फुदकता था , उडता था , पर यह नहीं जानता था कि क़ायदा-क़ानून किसे कहते हैं। राजा बोले , '' ऐसा तोता किस काम का ? इससे लाभ तो कोई नहीं , हानि जरूर है। जंगल के फल खा जाता है , जिससे राजा-मण्डी के फल-ब़ाजार में टोटा पड़ जाता है। '' मंत्री को बुलाकर कहा , '' इस तोते को शिक्षा दो! '' 2 तोते को शिक्षा देने का काम राजा के भानजे को मिला। पण्डितों की बैठक हुई। विषय था , '' उक्त जीव की अविद्या का कारण क्या है ?'' बड़ा गहरा विचार हुआ। सिद्धान्त ठहरा : तोता अपना घोंसला साधारण खर-पात से बनाता है। ऐसे आवास में विद्या नहीं आती। इसलिए सबसे पहले तो यह आवश्यक है कि इसके लिए कोई बढ़िया-सा पिंजरा बना दिया जाय। राज-पण्डितों को दक्षिणा मिली और वे प्रसन्न होकर अपने-अपने घर गये। 3 सुनार बुलाया गया। वह सोने का पिंजरा तैयार करने में जुट पड़ा। पिंजरा ऐसा अनोखा बना कि उसे देखने के लिए देश-विदेश के लोग टूट पडे। कोई कहता , '' शिक्षा की तो ...