भीड़ की हिंसा – बेचेहरा हत्यारा या समाज का हत्यारा चेहरा?
भीड़ की हिंसा – बेचेहरा हत्यारा या समाज का हत्यारा चेहरा? कविता कृष्णपल्लवी ( जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा पर नियंत्रण के लिए सरकार को निर्देश दिए , उसी दिन झारखण्ड में ' जय श्रीराम ' के नारे लगते हुए एक वहशी भीड़ अस्सी वर्षीय आर्यसमाजी संत स्वामी अग्निवेश पर टूट पड़ी। अब सोशल मीडिया पर सैकड़ों ट्रोल अग्निवेश को हिन्दू धर्म-द्रोही और देशद्रोही बताते हुए इस घटना को उचित ठहरा रहे हैं। मधुकिश्वर अग्निवेश को फ्रॉड और धंधेबाज बता रही हैं । अग्निवेश मानवाधिकारों के लिए लम्बे समय से आवाज़ उठाते रहे हैं और आर्य समाज के स्टैंडपॉइंट से हिन्दू धर्म की कुरीतियों और अंधविश्वासों की आलोचना करते रहे हैं । कश्मीर में शांति-बहाली के लिए अग्निवेश ही नहीं , तमाम जाने-माने लोग अलगाववादी नेताओं से भी मिलते रहे हैं । अब यासीन मलिक और हुर्रियत नेताओं के साथ अग्निवेश की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर संघी ट्रोल उन्हें देशद्रोही सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं । झारखंड में अग्निवेश पर हमले के कुछ ही दिनों पहले भाजपा के एक केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने एक मांस-विक्रेता ...