नाटक - राजा का बाजा / सफदर हाशमी व साथी
राजा का बाजा सफदर हाशमी व साथी [ पाँच दानव हाथ थामकर नाचते हैं।] पहला : दौलत मेरी गाभिन गाय , शिक्षा घर का बैल। फ़ैक्टरियों की थानेदारी , संसद मेरी रखैल। [ बाक़ी चारों दोहराते हैं।] दूसरा : लाखों का धन्धा है अपना , थोक की है व्यापारी। शेयर बाज़ार पर हरदम रखता चौकस पहरेदारी। [ बाक़ी चारों दोहराते हैं।] तीसरा : गेहूँ चावल ज्वार बाजरा , मक्का चना मसूर। ...