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कविता - उसने जन्म दिया / पाब्लो नेरूदा Poem - It is Born / Pablo Neruda

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  कविता - उसने जन्म दिया पाब्लो नेरूदा (अंग्रेजी से अनुवाद : राम कृष्ण पाण्डेय) मैं यहाँ बिल्कुल किनारे आकर खड़ा हूँ जहाँ और कुछ कहने के लिए है ही नहीं सबको जलवायु और समुद्र ने सोख लिया है और चाँद तैरता हुआ चला जा रहा है नेपथ्य में किरणों की माला नहीं चाँदी-सी उजली है सिर्फ़ चाँदी-सी यह रात और इसी बीच अँधेरा चूर-चूर हो जाएगा मात्र एक लहर की चोट से डैने खुल जाएँगे एक आग पैदा होगी और सब कुछ भोर की तरह फिर से नीला हो जाएगा Poem - It is Born Pablo Neruda Here I came to the very edge where nothing at all needs saying, everything is absorbed through weather and the sea, and the moon swam back, its rays all silvered, and time and again the darkness would be broken by the crash of a wave, and every day on the balcony of the sea, wings open, fire is born, and everything is blue again like morning. From Neruda's beautifully illustrated "On the Blue Shores of Silence", this poem is short, powerful and elegant.

मजदूर वर्ग के बारे में विश्‍व के महान कवियों की दस कविताएं

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मजदूर वर्ग के बारे में विश् ‍ व के महान कवियों की दस कविताएं ➖➖➖1⃣➖➖➖ हम लोहार फ़ि ‍ लिप श्क्युलोव रूसी भाषा से अनुवाद और गीत का परिचयः गौतम कश्यप   हम लोहार हैं , और हमारी आत्मा है जवान हम बनाते हैं खुशियों की चाबियाँ। ऊपर उठते हैं , हमारे मजबूत हथोड़े , और बजते हैं , फौलादी सीने पर , ठक ठक ठक! हम कर रहे हैं स्थापित , एक उज्ज्वल पथ , और निर्मित कर रहे हैं एक स्वतंत्र पथ , सबके लिए , जो है लम्बे समय से इच्छित। मिलकर लड़ाइयाँ लड़ी हैं हमने , और हम साथ मरेंगे मरेंगे मरेंगे! हम लोहार हैं , अपनी प्रिय जन्मभूमि के हम केवल चाहते हैं , सबकुछ अच्छा , हम अपनी ऊर्जा व्यर्थ नष्ट नहीं कर रहे हैं , निरुद्देश्य नहीं चल रहे हमारे हथोड़े , ठक ठक ठक! और हथोड़े की हर चोट के बाद धुन्ध छँटेगी , अत्याचार का नाश होगा। और सारी पृथ्वी के क्षेत्रों के साथ एक दीन राष्ट्र , उठेगा , उठेगा , उठेगा! ‘ हम लोहार हैं’ यह रूसी गीत उन दिनों बहुत प्रसिद्ध हुआ था जब सोवियत संघ में महान समाजवादी अक्टूबर क्रान्ति अपने चरम पर थी। 1912 ईस्वी में फ़ि ‍ लिप श्क्युलोव ने इसकी रचना की थी।...

लें कुछ बेहतरीन पुस्‍तकें पढ़ने का संकल्‍प क्‍योंकि

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लें कुछ बेहतरीन पुस् ‍ तकें पढ़ने का संकल् ‍ प क् ‍ योंकि “ पुस्तक एक पीढ़ी की अपने बाद आने वाली पीढ़ी के लिए आत्मिक वसीयत होती है , मृत्यु के कगार पर खड़े वृद्ध की जीवन में पहले डग भर रहे नवयुवक के लिए सलाह होती है , ड्यूटी पूरी करके जा रहे सन्तरी का ड्यटी पर आ रहे सन्तरी को आदेश होती है… पुस्तक भविष्य का कार्यक्रम होती है। ” 🖌 अलेक्सान्द्र हर्ज़ेन “पुस्तक भी जीवन और मानव के समान ही है।   वह भी एक सजीव तथा बोलता तथ्य है , और वह उन सब वस्तुओं की तुलना में जिसकी सृष्टि मनुष्य ने की है , या कर रहा है , सब से कम “वस्तु” है।” 🖌 मक्सिम गोर्की , पेज – 37, पुस्तक “सृजन प्रक्रिया और शिल्प के बारे में” से “जो किताबें आपको सोचने के लिए जितना ही ज़्यादा मजबूर करती हैं वे आपके लिए उतनी ही ज़्यादा मददगार साबित होती हैं । सीखने का सबसे मुश्किल तरीका होता है , आरामतलबी से पढ़ना ; परन्तु किसी महान चिन्तक की एक महान किताब विचारों के एक ऐसे जहाज की तरह होती है जो सच्चाई और ख़ूबसूरती से ठसाठस लदा होता है।” 🖌 पाब् ‍ लो नेरूदा “किताबें करती हैं बातें बीते ज़माने की , दुनिया...

देश-दुनिया के प्रसिद्ध 18 कवियों की 18 कविताएं

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देश-दुनिया के प्रसिद्ध 18 कवियों की 18 कविताएं (1) अवतार सिंह पाश (सबसे खतरनाक) मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है सबसे ख़तरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है जुगनुओं की लौ में पढ़ना मुट्ठियां भींचकर बस वक्‍़त निकाल लेना बुरा तो है सबसे ख़तरनाक नहीं होता सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना तड़प का न होना सब कुछ सहन कर जाना घर से निकलना काम पर और काम से लौटकर घर आना सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना सबसे ख़तरनाक वो घड़ी होती है आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो आपकी नज़र में रुकी होती है सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्‍बत से चूमना भूल जाती है और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है सबसे ख़तरनाक वो गीत होता है जो मरसिए की तरह पढ़ा जाता है आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर गुंडों की तरह अकड़ता है सबसे ख़तरनाक वो चांद होता है जो हर हत्‍या...