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विविध उद्धरण

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विविध उद्धरण मैं तुम्हें बु ‍ द्धिमत्ता की लड़ाई के लिए ललकारता लेकिन मैं देख रहा हूं कि तुम निहत्थे हो। ✍   विलियम शेक्सपीयर ________________________ बिना किसी अपवाद के , और बिना किसी की भावनाओं का ख़याल किए , सभी चीज़ों का परीक्षण होना चाहिए , उनपर बहस होनी चाहिए और उनकी जाँच-पड़ताल होनी चाहिए | ✍   देनी दिदेरो ( प्रबोधनकालीन फ्रांसीसी दार्शनिक ) ________________________ तर्कणा हमेशा मौजूद रही है , लेकिन हमेशा तर्कसंगत रूप में नहीं। ✍   कार्ल मार्क्स ________________________ किसी भी चीज़ को महज विश् ‍ वास पर स् ‍ वीकार करना , आलोचनात् ‍ मक अमल और विकास का प्रतिषेध करना एक दारुण अपराध है। ✍   लेनिन ________________________ मनुष्य कठिन प्रयास करते हुए मगरमच्छ की दंतपंक्ति के बीच से मणि बाहर ला सकता है , वह उठती-गिरती लहरों से व्याप्त समुद्र को तैरकर पार कर सकता है , क्रुद्ध सर्प को फूलों की भांति सिर पर धारण कर सकता है , किंतु दुराग्रह से ग्रस्त मूर्ख व्यक्ति को अपनी बातों से संतुष्ट नहीं कर सकता है । ( भर्तृहरि विरचित नीतिशतकम् , श्...