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याङ मो लिखित तरुणाई का तराना उपन्‍यास की पीडीएफ फाइल PDF File of the Yang Mo's Novel The Song of Youth

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याङ मो लिखित तरुणाई का तराना उपन्‍यास की पीडीएफ फाइल युवा क्रान्तिकारियों के बलिदान की गाथा PDF File of t he Yang Mo's Novel The Song of Youth The Saga of the Sacrifice of Young Revolutionaries पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक  हिन्दी PDF in English डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 8828320322 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें पुस्‍तक का संक्षिप्‍त परिचय ‘तरुणाई का तराना’ चीन की क्रान्तिकारी लेखिका याङ मो का उपन्यास है जो अर्द्ध-सामन्ती अर्द्ध-औपनिवेशिक चीनी समाज की मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे नौजवान छात्र-छात्राओं की शौर्यगाथा का अत्यन्त सजीव, प्रेरणादायी और रोचक वर्णन करता है। याङ मो का जन्म पीकिङ में हुआ था। उनके पिता एक निजी विश्वविद्यालय चलाते थे लेकिन जब वह बारह वर्ष की थीं तभी वह बन्द हो गया और उनका परिवार आर्थिक परेशानियों में घिर गया। जब वह स्कूल में थीं तभी उनके पिता ने तंगी से निकलने के लिए एक धनी व्यक्ति से उनकी शादी तय कर दी लेकिन याङ मो ने घर छोड़ दिया और पीकिङ के पास एक गाँव के स्कूल में पढ़ाने लगीं। पीकिङ विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान ही उन्होंने 1934 में कहानियाँ लिखना शुर...

कहानी - हिरनौटा / मीत्री मामिन-सिबिर्याक

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कहानी - हिरनौटा मीत्री मामिन-सिबिर्याक 1884 में लिखी गई कहानी ' हिरनौटा ' के लेखक मीत्री मामिन-सिबिर्याक का जन्म उराल में हुआ और यहीं उन्होंने जीवन के अधिकांश वर्ष बिताए। उराल पहाड़ों और जंगलों का इलाक़ा है , जहां 18 वीं सदी के आरम्भ में ज़ार प्योत्र प्रथम के ज़माने में रूसी सौदागरों ने लोहे के कारखाने बनाये थे। लेखक ने अपने संस्मरणों में लिखा था : “ अभी तक मेरी आंखों के आगे लकड़ी का वह पुराना घर है , जिसकी पांच खिड़कियां चौक पर खुलती थीं। उसकी खूबी यह थी कि एक ओर उसकी खिड़कियां यूरोप में खुलती थीं और दूसरी ओर – एशिया में। मेरे पिता मुझे दूर की पहाड़ियां दिखाते हुए बताया करते थे : ' वह देखो , वे पहाड़ एशिया में हैं , हम यूरोप और एशिया की सीमा रेखा पर रहते हैं... ’” लेखक के पिता एक कारखाने के पादरी थे और कोई खास अमीर आदमी नहीं थे , लेकिन उन्हें किताबों का बड़ा शौक़ था। वह अपनी आमदनी का बड़ा भाग किताबें खरीदने पर खर्च करते थे। बेटे को पिता से यह साहित्य-प्रेम विरासत में मिला। मामिन- सिबिर्याक उराल के सौदागरों , कारखानेदारों और आम लोगों के बारे में उपन्यास लिखते थे। उन द...