धर्म के प्रश्न पर मार्क्सवादी अवस्थिति
धर्म के प्रश्न पर मार्क्सवादी अवस्थिति धर्म को एक व्यक्तिगत मामला घोषित कर दिया जाना चाहिएा समाजवादी अक्सर धर्म के प्रति अपने दृष्टिकोण को इन्हीं शब्दों में व्यक्त करते हैं। किन्तु किसी प्रकार की गलतफहमी न हो इसलिए आवश्यक है कि इन शब्दों के अर्थ की बिल्कुल ठीक-ठाक व्याख्या कर दी जाय। हम माँग करते हैं कि जहां तक राज्य का सम्बन्ध है , उसे धर्म को एक व्यक्तिगत चीज़ मानना चाहिए। किन्तु जहां तक हमारी पार्टी का सम्बन्ध है , धर्म को हम किसी भी प्रकार से एक व्यक्तिगत मामला नहीं मान सकते। धर्म से राज्य का कोई भी सम्बन्ध नहीं होना चाहिए और धामिर्क सोसाइटियों का भी सरकार की सत्ता से कोई सरोकार नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह चाहे जिस धर्म को माने , या चाहे तो किसी धर्म को न माने , अर्थात नास्तिक हो , जो आम तौर से , हर समाजवादी होता है। नागरिकों के साथ धामिर्क विश्वासों के आधार पर भेदभाव किया जाना सर्वथा असहनीय है। सरकारी कागजों में तो नागरिक के धर्म का उल्लेख भी निस्सन्देह समाप्त कर दिया जाना चाहिए। स्थापित चर्च को क...