Posts

Showing posts with the label Parsai

हरिशंकर परसाई का निबंध - आवारा भीड़ के खतरे The Dangers of a Restless Mob / Harishankar Parsai

Image
हरिशंकर परसाई का निबंध - आवारा भीड़ के खतरे एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर। इलाहाबाद के लक्ष्मीकान्त वर्मा ने बताया-पिछली दीपावली पर एक साड़ी की दुकान पर काँच के केस में सुंदर साड़ी से सजी एक सुंदर मॉडल खड़ी थी। एक युवक ने एकाएक पत्थर उठाकर उस पर दे मारा। काँच टूट गया। आसपास के लोगों ने पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया ? उसने तमतमाए चेहरे से जवाब दिया-हरामजादी बहुत खूबसूरत है। हम 4-5 लेखक चर्चा करते रहे कि लड़के के इस कृत्य का क्या कारण है ? क्या अर्थ है ? यह कैसी मानसिकता है ? यह मानसिकता क्यों बनी ? बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में ये सवाल दुनिया भर में युवाओं के बारे में उठ रहे हैं-पश्चिम से संपन्न देशों में भी और तीसरी दुनियाँ के गरीब देशों में भी। अमेरिका से आवारा हिप्पी और ‘हरे राम और हरे कृष्ण’ गाते अपनी व्यवस्था से असंतुष्ट युवा भारत आते हैं और भारत का युवा लालायित रहता है कि चाहे चपरासी का नाम मिले , अमेरिका में रहूँ। ‘स्टेट्स’ जाना यानि चौबीस घंटे गंगा नहाना है। ये अपवाद हैं। भीड़-की-भीड़ उन युवकों की है जो हताश , बेकार और क्रुद्ध हैं। संपन्न पश्चिम के युवको...

भेड़ि‍ये के बारे में दो कहानियां

Image
भेड़ि‍ये के बारे में दो कहानियां  ये कहानियां बचपन में हम सबने पढ़ी हैं। वर्तमान पूँजीवादी लोकतंत्र की हालात बयां करती ये कहानियां अपनी समझ के आइने में एक बार फिर पढ़ें।   भेड़िया और मेमना एक बार एक भेड़िया किसी पहाड़ी नदी में एक ऊंचे स्थान पर पानी पी रहा था। अचानक उसकी नजर एक भोले-भाले मेमने पर पड़ी , जो पानी पी रहा था। भेड़िया मेमने को देखकर अति प्रसन्न हुआ और सोचने लगा- ‘वर्षों बीत गए , मैंने किसी मेमने का मांस नहीं खाया। यह तो छोटी उम्र का है। बड़ा मुलायम मांस होगा इसका। आह! मेरे मुंह में तो पानी भी आ गया। क्या ही अच्छा होता जो मैं इसे खा पाता।’ और अचानक वह भेड़िया चिल्लाने लगा- ”ओ गंदे जानवर! क्या कर रहे हो ? मेरा पीने का पानी गंदा कर रहे हो ? यह देखो पानी में कितना कूड़ा-करकट मिला दिया है तुमने ?“ मेमना उस विशाल भेड़िये को देखकर सहम गया। भेड़िया बार-बार अपने होंठ चाट रहा था। उसके मुंह में पानी भर आया था। मेमना डर से कांपने लगा। भेड़िया उससे कुछ गज के फासले पर ही था। फिर भी उसने हिम्मत बटोरी और कहा- ”श्रीमान! आप जहां पानी पी रहे हैं , वह जगह ऊंची है। नद...