जियो को फायदा पहुँचाने के लिए बीएसएनएल को मोदी सरकार में किस तरह से बर्बाद किया गया, जानें।
बीएसएनएल को मोदी सरकार में किस तरह से बर्बाद किया गया गिरीश मालवीय यह बात सभी को पता है कि किस तरह से 4g स्पेक्ट्रम BSNL को न देकर बाकी सब कंपनियों को दिया गया। मोदी सरकार की मंशा जियो को प्रमोट करने की थी और उसी को आगे बढाने के लिए बीएसएनएल को धीमा जहर दिया गया। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रिलायंस को सिर्फ डेटा सर्विस के लिए लाइसेंस दिया गया था, लेकिन बाद में 40 हजार करोड़ रुपये की फीस की बजाय 1,600 करोड़ रुपये में ही वॉयस सर्विस का लाइसेंस दे दिया गया, लेकिन जियो के पास इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव था और यही से मोदी सरकार ने बीएसएनएल के इंफ्रास्ट्रक्चर को धीरे धीरे जिओ को देना शुरू किया। 2014 में आते ही मोदी सरकार द्वारा एक टॉवर पॉलिसी की घोषणा की गयी और दबाव डालकर रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड से भारत संचार निगम लिमिटेड के साथ मास्टर शेयरिंग समझौता करवा दिया। इस समझौते के तहत रिलायंस जिओ बीएसएनएल के देशभर में मौजूद 62,000 टॉवर्स का उपयोग कर सकती थी। इनमें से 50,000 में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध थी। यह जियो के लिए संजीवनी मिलने जैसा था क्योंकि वह चाहे कितना भी प...