इन्साफ़पसन्द लोगों को इज़रायल का विरोध और फ़िलिस्तीन का समर्थन क्यों करना चाहिए?
इन् साफ़पसन् द लोगों को इज़रायल का विरोध और फ़िलिस् तीन का समर्थन क् यों करना चाहिए ? आनन्द सिंह हम इन् साफ़पसन् द लोगों से मुख़ातिब हैं। जो लोग न् याय और अन् याय के बीच की लड़ाई में ताक़त के हिसाब से या समाज और मीडिया में प्रचलित धारणाओं के अुनसार आँखें और दिमाग़ बन्द करके अपना पक्ष चुनते हैं वे इस पोस् ट को न पढ़ें। आज हमसे हज़ारों मील दूर ग़ाज़ा में ज़ायनवादी इज़रायल इस सदी के सबसे बर्बर क़िस् म के जनसंहार को अंजाम दे रहा है। इस वीभत् स नरसंहार पर ख़ामोश रहकर या दोनो पक्षों को बराबर का ज़िम् मेदार ठहराकर हम इसे बढ़ावा देने का ही काम करेंगे। जो लोग इज़रायल और फ़िलिस् तीन के विवाद के इतिहास को ढंग से नहीं जानते वही लोग दोनो पक्षों को बराबर का ज़िम् मेदार ठहराकर दोनों से हिंसा छोड़ने का आग्रह करते हैं। अगर वे संज़ीदगी से इतिहास पढ़ें तो पायेंगे कि 1948 में इज़रायल नामक राष् ट्र का जन् म ही फ़िलिस् तीनियों की ज़मीन पर क़ब् ज़ा करके , उनको उनकी ही ज़मीन से बेदख़ल करके और बड़े पैमान पर क़त् लेआम को अंजाम देकर हुआ था। उसके बाद से क़ब् ज...