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फासीवादियों की कुछ विशेषताएं

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फासीवादियों की कुछ विशेषताएं   कविता कृष्णपल्लवी फासिस्टों में स्वस्थ हास्य-बोध नहीं होता! और व्यंग्य अगर बेहद स्थूल न हो तो उनके पल्ले नहीं पड़ता I सभी फासिस्ट ज्ञान , तर्क , न्याय और समानता की बातों से घृणा करते हैं! वे सच से घृणा करते हैं और डरते हैं! आधुनिक जीवन की सारी सुख-सुविधाओं का लाभ उठाते हुए भी वे धर्मग्रंथों को ' अथॉरिटी ' मानते हैं , अतीत का महिमा-मंडन करते हैं , गरीबों को वैराग्यवाद और भाग्यवाद का पाठ पढ़ाते हैं और अंध-विश्वासों का प्रचार करते हैं! निकटतम व्यक्ति पर भी फासिस्ट भरोसा नहीं करते! उनका कोई विश्वसनीय मित्र नहीं होता! फासिस्ट मज़दूरों से घृणा करते हैं और उन्हें मूक , झुकी पीठ वाले गुलामों के रूप में देखना चाहते हैं! मज़दूर आन्दोलनों को कुचलने के लिए वे नरसंहार तक करने को तैयार रहते हैं! फासिस्ट समाजवाद ही नहीं , बुर्जुआ लोकतंत्र से भी घृणा करते हैं! नागरिक अधिकार और जनवादी अधिकारों की बात करने वालों को वे मसल-कुचल देना चाहते हैं! फासिस्ट स्वतंत्र स्त्रियों से भय-मिश्रित घृणा से भरे होते हैं! वे उन्हें डरावनी और संस्कृति-विनाशक प्रतीत होती हैं! नैसर्गिक प्र...

लेव तोल्स्तोय के महान उपन्यास ‘युद्ध और शान्ति’ की पीडीएफ फाइल PDF File of Great Novel of Leo Tolstoy - War and Peace

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लेव तोल्स्तोय के महान उपन्यास ‘युद्ध और शान्ति’ की पीडीएफ फाइल PDF File of Great Novel of Leo Tolstoy - War and Peace  पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक  खण्‍ड - 1 खण्‍ड - 2 खण्‍ड - 3 खण्‍ड - 4 PDF in English (All parts in one file) डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 9892808704 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें लेनिन ने लिखा था कि तोल्स्तोय “ इतनी अधिक संख्या में महान समस्याओं को उठाने में सफल रहे और कलात्मक शक्ति की ऐसी ऊँचाइयों तक ऊपर उठने में सफल रहे कि उनका कृतित्व विश्व साहित्य के महानतम की कोटि में शामिल हो गया। " आम तौर पर,  तोल्स्तोय को उनके दो वृहद और महान उपन्यासों -‘ युद्ध और शान्ति’ तथा ‘आन्ना कारेनिना’ के लिए जाना जाता है। इनकी गणना निर्विवाद रूप से ,  अब तक लिखे गये दुनिया के सर्वोत्कृष्ट उपन्यासों में की जाती है। कुछ लोग उनके तीसरे प्रसिद्ध उपन्यास ‘पुनरुत्थान’ को भी इसी कोटि में शामिल करते हैं। उनकी एक और चर्चित कृति ‘इवान इलिच की मौत’ की गणना उपन्यासिका के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में की जाती है। अपने अन्तिम तीस वर्षों के दौरान एक धार्मिक और नैतिक शिक्षक के रूप में उन...

तोल्स्तोय : रूसी क्रान्ति के दर्पण (तोल्स्तोय का विस्‍तृत साहित्‍यि‍क परिचय) / कात्यायनी, सत्यम

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तोल्स्तोय : रूसी क्रान्ति के दर्पण   (तोल्स्तोय का विस्‍तृत साहित्‍यि‍क परिचय) कात्यायनी , सत्यम इस लेख की पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए लिंक आधुनिक इतिहास में यदि किसी विचारक–लेखक की ख्याति उसकी ज़िन्दगी में ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और जीते–जी ही यदि वह एक मिथक बन गया था , तो वे निस्सन्देह लेव तोल्स्तोय ही थे। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर जिस तरह बाल्ज़ाक छाये हुए थे , उसी तरह उत्तरार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर तोल्स्तोय का प्रभाव–साम्राज्य फैला हुआ था। मानव–जीवन की समस्त त्रासदियों–विडम्बनाओं का तर्कपरक , इतिहाससंगत और वस्तुगत निरूपण और व्याख्या करते–करते तोल्स्तोय हालाँकि ऐतिहासिक विकृतियों से मुक्त एक “सच्चे” ईसाई धर्म में , और आत्म–परिष्करण के जरिए आधुनिक सभ्यता की सभी बुराइयों का समाधान प्रस्तुत करते हैं , लेकिन कलात्मक–दार्शनिक चिन्तन के इस अन्तरविरोध के बावजूद वे , मुख्य पहलू की दृष्टि से , एक महान मानवतावादी चिन्तक और महान यथार्थवादी कलाकार थे। अपने ‘लेजिटिमिस्ट’ राजनीतिक विचारों के बावजूद बाल्ज़ाक ने ह्रासमान वर्गों की नियति और “भव...