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कविता - आधुनिक काल / बॉबी सैन्डस Poem - Modern Times / Bobby Sands

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कविता - आधुनिक काल बॉबी सैन्डस For English version please scroll down  आयरलैण्ड की मुक्ति के लिए संघर्ष करने वाले युवा क्रान्तिकारी बॉबी सैन्डस को ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने बेलफॉस्ट जेल में कैद कर रखा था जहाँ वह भारतीय क्रान्तिकारी यतीन्द्रनाथ दास के ही समान राजनीतिक बन्दी ‍   का दर्जा देने की माँग को लेकर अनशन करते हुए 5 मई 1981 को शहीद हो गये। उनके 9 अन्‍य साथी अगले तीन महीनों में शहीद हो गये थे।  बॉबी सैन्डस की यह कविता वर्तमान पूँजीवादी सभ्यता की चकाचौंध के पीछे के उत्पीड़न , अपराध और रक्त से सराबोर अंधेरे की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करती है। कहा जाता है हम रहते हैं आधुनिक काल में उन्यासी के सुसभ्य साल में पर नजरें दौड़ाता हूँ जब मैं अपने चारों ओर देख पाता हूँ सिर्फ आधुनिक यातना , दर्द और ढोंग। छोटे बच्चे मरते हैं आधुनिक काल में। मरते हैं वे भूखों तड़प-तड़पकर , कौन यह पूछने की हिम्मत करता है , “ आखिर क्यों ॽ” नापाम बमों से आहत भागती हैं निर्वस्त्र नन्हीं लड़कियाँ अपनी चीखों से भेदती हुई रात की हवाओं को और जब मोटे थुलथुल तानाशाह आसीन होते हैं अपने सिंहासनो...

गोर्की के पहले उपन्यास ‘अभागा' की पीडीएफ फाइल PDF file of Maxim Gorky's First Novel - Orphan Paul

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  गोर्की के पहले उपन्यास ‘अभागा' की पीडीएफ फाइल  PDF file of Maxim Gorky's First Novel - Orphan Paul हिन्‍दी पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक   Link for English PDF File - (Translation by Lily Turner and Mark O. Strever) डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 9892808704 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें इस पुस्तक के बारे में ‘अभागा’ मक्सिम गोर्की के एक प्रारम्भिक उपन्यास का हिन्दी अनुवाद है। यह उपन्यास अंग्रेजी में ‘लकलेस पावेल’ या ‘आर्फन पाल’ नाम से विगत शताब्दी के पूर्वार्द्ध में प्रकाशित हुआ था। उसी अंग्रेज़ी अनुवाद से नूर नबी अब्बासी ने यह हिन्दी अनुवाद किया था जो 1954 में नवयुग प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हुआ था। नूर नबी अब्बासी उस दौर के सुप्रसिद्ध अनुवादक थे जिन्होंने मक्सिम गोर्की और हावर्ड फ़ास्ट जैसे कई लेखकों की कृतियों से पाँचवें-छठे दशक में हिन्दी पाठकों को परिचित कराने का महत्त्वपूर्ण काम किया था। जनता की संस्कृति और हिन्दी भाषा की महत्त्वपूर्ण सेवा करने वाले ऐसे लोग आज भुलाये जा चुके हैं, यह अफ़सोस की बात है। इस अनूदित कृति के ऐतिहासिक महत्त्व को ध्यान में रखते हुए, अनुवाद...

क‍व‍िता - प्यार / कविता कृष्णपल्लवी

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क‍व‍िता -  प्‍यार कविता कृष्णपल्लवी   प्यार वही, सिर्फ़ वही कर सकता है जो निर्भय होI प्यार वही कर सकता है जिसका ह्रदय सघन संवेदनाओं से भरा हो अपने लोगों के लिएI फासिस्ट समय हमें अकेला करता हैI अकेलापन हमें भयग्रस्त करता हैI आतंक की ठंडी बारिश में दिन-रात भीगते रहते हैं हमारे ह्रदय, अकड़ते और सिकुड़ते हुए धीरे-धीरे अपनी सारी संवेदनाएँ खो देते हैंI सुन्दरता और कला और मनुष्यता बस यही होती है कि हम सुनते रहते हैं एक प्रेतात्मा को खून सनी उँगलियों से पियानो बजाते हुए और उसके आदी होते रहते हैंI इसतरह न जाने कब हम खो देते हैं प्यार करने की अपनी कूव्वत और उदास पेड़ बन जाते हैं सड़क किनारे खड़े जिससे होकर हत्यारे रोज़ गुज़रते हैंI पेड़ से मनुष्य बनने के लिए होना पड़ेगा निर्भय ढूँढ़ने होंगे संगी-साथी और तनकर खडा होना होगा फासिस्ट समय के ख़िलाफ़, अपनी अपहृत संवेदनाओं को फिर से पाने के लिए लड़ना होगा एक कठिन युद्ध और प्यार करने का दुर्लभ और कठिन हुनर फिर से सीखना होगाI

कहानी - माँ और बेटा / गाय दी मोपासां Story - Mother And Son / Guy de Maupassant

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कहानी - माँ और बेटा गाय दी मोपासां For English version please scroll down  रात का खाना खत्म कर मर्दो की टोली धूम्रपान कक्ष में बातचीत कर रही थी। वे सब अप्रत्याशित विरासत और विचित्र रूप से पैतृक धन मिल जाने के विषय पर चर्चा कर रहे थे। तब मास्टर ले ब्रुमेंट आगे बढ़े और आग की ओर अपनी पीठ करके खड़े हो गए। उन्हें हम लोग कभी एक शानदार न्यायाधीश तो कभी शानदार वकील कहा करते थे। उन्होंने कहा , मुझे एक ऐसे उत्तराधिकारी को ढूँढ़ना है , जो चिंताजनक परिस्थितियों में अजीब तरीके से गायब हो गया है। आम तौर पर यह जिंदगी में सामने आनेवाली भयावह घटनाओं में से एक है। शायद ऐसी घटनाएँ आए दिन होती हैं , लेकिन जहाँ तक मैं समझता हूँ , जिस घटना का जिक्र मैं कर रहा हूँ , वह शायद सबसे डरावनी है। उस घटना से जुड़े ये कुछ तथ्य हैं , जो मैं आप सबके सामने रख रहा हूँ - करीब छह महीने पहले मैं एक ऐसी महिला के सामने खड़ा था, जो अपनी अंतिम साँसें ले रही थी। उसने मुझसे कहा , महोदय , मैं आपको एक ऐसी जिम्मेदारी सौंप रही हूँ , जो सबसे संकटपूर्ण , सबसे कठिन और सबसे ज्यादा थका देनेवाली है। कृपा कर मेरी उस वसीयत को पढ़ ल...

मार्क्‍सवाद की महत्‍वपूर्ण कृति ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की पीडीएफ फाइल PDF file of important writing of Marxism 'Anti-Duhring'

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मार्क्‍सवाद की महत्‍वपूर्ण कृति ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की पीडीएफ फाइल PDF file of important writing of Marxism 'Anti-Duhring' हिन्‍दी पीडीएफ फाइल डाउनलोड लिंक   Link for English PDF File डाउनलोड करने में कोई समस्‍या आये तो 9892808704 पर व्‍हाटसएप्‍प संदेश भेजें For English preface please scroll down  प्रकाशक की ओर से एंगेल्स ने ‘ड्यूहरिंग मत-खण्‍डन’ की रचना 1876 - 1878 के दौरान की। वह पूंजीवाद के तीव्र किंतु अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण विकास का काल था। इसके साथ ही उस समय तक पूंजीवादी उत्पादन का विकास अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया था। 1873 के विश्व आर्थिक संकट के कारण इजारेदारी संघों का तीव्र और व्यापक विकास हुआ। वह इजारेदारी-पूर्व पूंजीवाद से इजारेदारी पूंजीवाद में संक्रमण काल की शुरूआत थी , जो बीसवीं सदी के प्रारंभ में समाप्त हुआ। विश्व इतिहास में बुनियादी महत्व की घटना , जिसने सर्वहारा वर्ग के मुक्ति संघर्ष में एक नये दौर का सूत्रपात किया , पेरिस कम्यून (1871 ) था। सर्वहारा अधिनायकत्व स्थापित करने के इस प्रथम प्रयास के अनुभव ने यह सिद्ध कर दिया कि सर्वहारा क्...