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मजदूर वर्ग के बारे में विश्‍व के महान कवियों की दस कविताएं

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मजदूर वर्ग के बारे में विश् ‍ व के महान कवियों की दस कविताएं ➖➖➖1⃣➖➖➖ हम लोहार फ़ि ‍ लिप श्क्युलोव रूसी भाषा से अनुवाद और गीत का परिचयः गौतम कश्यप   हम लोहार हैं , और हमारी आत्मा है जवान हम बनाते हैं खुशियों की चाबियाँ। ऊपर उठते हैं , हमारे मजबूत हथोड़े , और बजते हैं , फौलादी सीने पर , ठक ठक ठक! हम कर रहे हैं स्थापित , एक उज्ज्वल पथ , और निर्मित कर रहे हैं एक स्वतंत्र पथ , सबके लिए , जो है लम्बे समय से इच्छित। मिलकर लड़ाइयाँ लड़ी हैं हमने , और हम साथ मरेंगे मरेंगे मरेंगे! हम लोहार हैं , अपनी प्रिय जन्मभूमि के हम केवल चाहते हैं , सबकुछ अच्छा , हम अपनी ऊर्जा व्यर्थ नष्ट नहीं कर रहे हैं , निरुद्देश्य नहीं चल रहे हमारे हथोड़े , ठक ठक ठक! और हथोड़े की हर चोट के बाद धुन्ध छँटेगी , अत्याचार का नाश होगा। और सारी पृथ्वी के क्षेत्रों के साथ एक दीन राष्ट्र , उठेगा , उठेगा , उठेगा! ‘ हम लोहार हैं’ यह रूसी गीत उन दिनों बहुत प्रसिद्ध हुआ था जब सोवियत संघ में महान समाजवादी अक्टूबर क्रान्ति अपने चरम पर थी। 1912 ईस्वी में फ़ि ‍ लिप श्क्युलोव ने इसकी रचना की थी।...

बिटकॉइन और क्रिप्‍टोकरेंसी: संकटग्रस्‍त पूँजीवाद के भीतर लोभ-लालच, सट्टेबाज़ी और अपराध को बढ़ावा देने के नये औजार

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  बिटकॉइन और क्रिप्‍टोकरेंसी: संकटग्रस्‍त पूँजीवाद के भीतर लोभ-लालच, सट्टेबाज़ी और अपराध को बढ़ावा देने के नये औजार आनन्‍द सिंह  हाल के वर्षों में भारत सहित दुनिया के कई हिस्‍सों में खाते-पीते लोगों के बीच बिटकॉइन और अन्‍य क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करके पैसे से पैसा बनाने की एक नयी सनक पैदा हुई है। इस सनक को बढ़ावा देने का काम इण्‍टरनेट, सोशल मीडिया और मुख्‍यधारा की मीडिया पर प्रसारित होने वाले विज्ञापनों ने किया है जिनमें  लोगों को बिना मेहनत किये रातों-रात अमीर बन जाने के सब्‍ज़बाग़ दिखाये जाते हैं। इन विज्ञापनों में लोगों को बताया जाता है कि क्रिप्‍टोकरेंसी में निवेश करके वे बैंक और शेयर बाज़ार में किये गये निवेश के मुक़ाबले कई गुना ज्‍़यादा पैसा बना सकते हैं। ऐसे में ताज्‍जुब की बात नहीं है कि हाल के वर्षों में दुनिया के तमाम देशों की ही तरह भारत के खाते-पीते लोगों ने इस देश के मज़दूरों के निर्मम शोषण से जमा की गयी पूँजी को क्रिप्‍टोकरेंसी में जमकर निवेश किया है। इस प्रक्रिया में कुछ लोगों ने ख़ूब पैसे कमाये भी हैं जिसकी वजह से अन्‍य लोगों को यह उम्‍मीद रहती है कि उनके...

कृषि क़ानून विवाद के पहले दौर में खेतिहर पूँजीपति वर्ग की औद्योगिक-वित्‍तीय बड़े पूँजीपति वर्ग पर जीत: मज़दूर वर्ग के लिए इसके निहितार्थ

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कृषि क़ानून विवाद के पहले दौर में खेतिहर पूँजीपति वर्ग की औद्योगिक-वित्‍तीय बड़े पूँजीपति वर्ग पर जीत: मज़दूर वर्ग के लिए इसके निहितार्थ अभिनव सिन्‍हा  For English, Marathi and Punjabi version, please scroll down  धनी कुलक और किसान, यानी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के खेतिहर पूँजीपति वर्ग ने पहले दौर में भारत के औद्योगिक-वित्‍तीय बड़े पूँजीपति वर्ग पर तात्‍कालिक जीत हासिल की है। मोदी सरकार के इस क़दम के कारण क्‍या हैं? आइए देखते हैं: कल मेघालय के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक ने मीडिया के ज़रिये मोदी सरकार को यह सन्‍देश दिया था कि उत्‍तर प्रदेश के आगामी विधान सभा चुनावों में भाजपा की पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में करारी हार होने वाली है। आरएसएस का ज़मीनी तंत्र भी भाजपा के नेतृत्‍व को ऐसी ही रिपोर्टें दे रहा था। सामान्‍य तौर पर उत्‍तर प्रदेश और ख़ासकर पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में रोज़गार, खाद्य सुरक्षा और ग़रीबी के मोर्चे पर भाजपा सरकार की ख़राब हालत देखते हुए भाजपा को उत्‍तर प्रदेश की गद्दी छिनने का भय सता रहा है। अगर ऐसा होता है तो 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के जीतने की सम...