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फासिस्टों के आतंक-राज का प्रतिरोध करते चुटकुले

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फासिस्टों के आतंक-राज का प्रतिरोध करते चुटकुले कविता कृष्‍णपल्‍लवी  रुडोल्फ़ हर्ज़ोग जर्मनी के एक प्रसिद्ध इतिहासकार और फिल्म-निर्माता हैं। वह विख्यात फिल्म-निर्देशक वर्नर हर्जोग के बेटे हैं। उनकी एक डाक्यूमेंट्री ' लाफिंग विद हिटलर ' नात्सी दौर में जनता में प्रचलित चुटकुलों पर और इस बात पर केन्द्रित है कि जनता फासिस्टों का मज़ाक उड़ाकर किस प्रकार अपनी नफ़रत और प्रतिरोध की स्पिरिट का इजहार करती थी। यह डाक्यूमेंट्री जर्मन चैनल वन और बी बी सी पर बहुत लोकप्रिय हुई थी। 2011 में रुडोल्फ़ हर्ज़ोग की पुस्तक ' डेड फनी ' प्रकाशित हुई , जिसका अंग्रेज़ी सहित कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इस पुस्तक में हर्ज़ोग ने उन तमाम मज़ाकों और चुटकुलों को शामिल किया है जो हिटलर के शासन-काल में आम लोग फासिस्टों के बारे में बनाते थे , एक दूसरे के कानों में फुसफुसाते थे और निजी बैठकियों में सुनाते थे। इनमें वे चुटकुले भी शामिल हैं जो कंसंट्रेशन कैम्पों में बंद लोग आपस में सुनाते थे और मौत के साए तले ठहाके लगाते थे। हर्ज़ोग की मान्यता है कि ये चुटकुले फासिज्म और दूसरे विश्वयुद्ध के ...

दूधनाथ सिंह की कहानी - नपनी

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दूधनाथ सिंह की कहानी - नपनी दूधनाथ सिंह (जन्म:17 अक्टूबर, 1936 एवं निधन 11 जनवरी, 2018) आधुनिक हिन् ‍ दी साहित् ‍ य के सबसे प्रसिद्ध कहानीकारों में से एक हैं कार स्टार्ट होते ही पिता जी ने पुत्र को आदेश दिया कि वह ट्रांजिस्टर बंद कर दे - `ये सब रद्द फद्द सुनने की क्या जरूरत है? कोई समाचार है। वे लोग क्या कर रहे हैं और कौन क्या बक रहा है, इससे हमें क्या मतलब? बेफालतू।' उन्होंने भुनभुना कर कहा। लड़के ने उनके चढ़े हुए तेवर देखे तो ट्रांजिस्टर बंद कर दिया। 'वैसे मैं गाना सुनने जा रहा था।' उसने सफाई दी। 'गाना फाना खाने को दे देगा?' पिता जी ने घुड़की दी। उन्होंने पीछे मुड़ कर देखा। उनकी पत्नी, बेटी और बड़े बेटे के दो बच्चे। बच्चों ने बाबा को घूरते देखा तो वे सिटपिटा गये। 'और वो नपनी कहाँ है?' पिता जी ने पूछा। लड़के ने बताया कि नपनी और अधिकारी जी और चपरासी पीछे वाली कार में हैं। 'भागलपुर कितने मील है?' पिता जी ने पूछा। उनको बताया गया कि भागलपुर कितनी दूर है। पिता जी ने जेब से एक मैला कुचैला पर्स निकाला, खोल कर देखा औ...

हरिशंकर परसाई की व्‍यंग्‍य कथा - जैसे उनके दिन फिरे

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हरिशंकर परसाई की व्यंग्य  कथा - जैसे उनके दिन फिरे एक था राजा। राजा के चार लड़के थे। रानियाँ? रानियाँ तो अनेक थीं, महल में एक 'पिंजरापोल' ही खुला था। पर बड़ी रानी ने बाकी रानियों के पुत्रों को जहर देकर मार डाला था। और इस बात से राजा साहब बहुत प्रसन्न हुए थे। क्योंकि वे नीतिवान थे और जानते थे कि चाणक्य का आदेश है, राजा अपने पुत्रों को भेड़िया समझे। बड़ी रानी के चारों लड़के जल् दी ही राजगद्दी पर बैठना चाहते थे, इसलिए राजा साहब को बूढ़ा होना पड़ा। एक दिन राजा साहब ने चारों पुत्रों को बुलाकर कहा, पुत्रों मेरी अब चौथी अवस्था आ गई है। दशरथ ने कान के पास के केश श्वेत होते ही राजगद्दी छोड़ दी थी। मेरे बाल खिचड़ी दिखते हैं, यद्यपि जब खिजाब घुल जाता है तब पूरा सिर श्वेत हो जाता है। मैं संन्यास लूँगा, तपस्या करूँगा। उस लोक को सुधारना है, ताकि तुम जब वहाँ आओ, तो तुम्हारे लिए मैं राजगद्दी तैयार रख सकूँ। आज मैंने तुम्हें यह बतलाने के लिए बुलाया है कि गद्दी पर चार के बैठ सकने लायक जगह नहीं है। अगर किसी प्रकार चारों समा भी गए तो आपस में धक्का-मुक्की होगी और सभी गिरोगे। मगर मैं दशर...

धन्‍धेबाज जग्‍गी वासुदेव उर्फ सद्गुरु के झूठ और मोदी का सपोर्ट सीएए अभियान

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सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर जगदीश उर्फ़ जग्गी वासुदेव उर्फ़ सद्गुरु द्वारा सत्ताधारियों के चरण चुम्बन! जग्गी वासुदेव द्वारा बोले गये झूठ तथा जनता द्वारा किये जा रहे सीएए एवं एनआरसी के विरोध की असलियत! अरविन्‍द   झूठ कम समय और शब्‍दों में बोला जा सकता है पर सच्‍चाई बयां करने के लिए समय और धैर्य की जरूरत होती है। इसीलिए जग्‍गी वासुदेव के 20 मिनट के वीडियो में बोले गये झूठ का पर्दाफाश करने में लेख लम्‍बा हो गया हैै। शिकायत ना करें। समय निकालकर पढ़ें और आगे फॉरवार्ड जरूर करें। यह कोई अचरज की बात नहीं है कि तमाम तरह के दन्द-फन्द और तिकड़म से अपना साम्राज्य फैलाने में लगा एक बहरूपिया भाजपा की फ़ासीवादी सरकार की नीतियों का झण्डाबदार बना हुआ है। सत्ता को अपने स्याह को सफ़ेद करने के लिए ऐसे ही दुष्प्रचारकों की ज़रूरत होती है और ऐसे पाखण्डियों को भी अपने काले साम्राज्य को कायम रखने के लिए सत्ता के आशीर्वाद की दरकार होती है। भौतिक वस्तुओं से परम सुख लूटकर अध्यात्मि ज्ञान के नाम पर लोगों की जेबें ढीली करने वाले ऐसे स्वयं नामधारी युगदृष्टाओं के लिए यह एकदम भौतिक क्रियाव्यापार है। यह ठी...