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असग़र वजाहत की कहानी - लिंचिंग Asghar Wajahat's story - Lynching

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असग़र वजाहत की कहानी - लिंचिंग बूढ़ी औरत को जब यह बताया गया कि उसके पोते सलीम की 'लिंचिंग' हो गई है तो उसकी समझ में कुछ न आया। उसके काले, झुर्रियों पड़े चेहरे और धुंधली मटमैली आंखों में कोई भाव न आया। उसने फटी चादर से अपना सिर ढक लिया। उसके लिए 'लिंचिंग' शब्द नया था। पर उसे यह अंदाजा हो गया था कि यह अंग्रेजी का शब्द है। इससे पहले भी उसने अंग्रेजी के कुछ शब्द सुने थे जिन्हें वह जानती थी। उसने अंग्रेजी का पहला शब्द 'पास' सुना था जब सलीम पहली क्लास में 'पास' हुआ था। वह जानती थी के 'पास' का क्या मतलब होता है। दूसरा शब्द उसने 'जॉब' सुना था। वह समझ गई थी कि 'जॉब' का मतलब नौकरी लग जाना है। तीसरा शब्द उसने 'सैलरी' सुना था। वह जानती थी 'सैलरी' का क्या मतलब होता है। यह शब्द सुनते ही उसकी नाक में तवे पर सिकती रोटी की सुगंध आ जाया करती थी। उसे अंदाज़ा था कि अंग्रेजी के शब्द अच्छे होते हैं और उसके पोते के बारे में यह कोई अच्छी खबर है। बुढ़िया इत्मीनान भरे स्वर में बोली- अल्लाह उनका भला करें.. लड़के हैरत से उसे देखने ल...

प्रेमचन्द की कहानी - नशा

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प्रेमचन्द की कहानी   - नशा ईश्वरी एक बड़े जमींदार का लड़का था और मैं एक गरीब क्लर्क का , जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी। हम दोनों में परस्पर बहसें होती रहती थीं। मैं जमींदारी की बुराई करता , उन्हें हिंसक पशु और खून चूसने वाली जोंक और वृक्षों की चोटी पर फूलने वाला बंझा कहता। वह जमींदारों का पक्ष लेता , पर स्वभावत: उसका पहलू कुछ कमजोर होता था , क्योंकि उसके पास जमींदारों के अनुकूल कोई दलील न थी। वह कहता कि सभी मनुष्य बराबर नहीं होते , छोटे-बड़े हमेशा होते रहते हैं और होते रहेंगे , लचर दलील थी। किसी मानुषीय या नैतिक नियम से इस व्यवस्था का औचित्य सिद्ध करना कठिन था। मैं इस वाद-विवाद की गर्मी-गर्मी में अक्सर   तेज हो जाता और लगने वाली बात कह जाता , लेकिन ईश्वरी हारकर भी मुस्कराता रहता था। मैंने उसे कभी गर्म होते नहीं देखा। शायद इसका कारण यह था कि वह अपने पक्ष की कमजोरी समझता था। नौकरों से वह सीधे मुँह बात नहीं करता था। अमीरों में जो एक बेदर्दी और उद्दण्डता होती है , इसमें उसे भी प्रचुर भाग मिला था। नौकर ने बिस्तर लगाने में जरा भी देर की , दूध जरूरत से ...

प्रेमचंद की कहानी - आहुति

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 प्रेमचंद की कहानी - आहुति  आनन्द ने गद्देदार कुर्सी पर बैठकर सिगार जलाते हुए कहा-आज विशम्भर ने कैसी हिमाकत की! इम्तहान करीब है और आप आज वालण्टियर बन बैठे। कहीं पकड़ गये, तो इम्तहान से हाथ धोएँगे। मेरा तो खयाल है कि वजीफ़ा भी बन्द हो जाएगा। सामने दूसरे बेंच पर रूपमणि बैठी एक अखबार पढ़ रही थी। उसकी आँखें अखबार की तरफ थीं; पर कान आनन्द की तरफ लगे हुए थे। बोली-यह तो बुरा हुआ। तुमने समझाया नहीं? आनन्द ने मुँह बनाकर कहा-जब कोई अपने को दूसरा गाँधी समझने लगे, तो उसे समझाना मुश्किल हो जाता है। वह उलटे मुझे समझाने लगता है। रूपमणि ने अखबार को समेटकर बालों को सँभालते हुए कहा-तुमने मुझे भी नहीं बताया, शायद मैं उसे रोक सकती। आनन्द ने कुछ चिढक़र कहा-तो अभी क्या हुआ, अभी तो शायद काँग्रेस आफिस ही में हो। जाकर रोक लो। आनन्द और विशम्भर दोनों ही यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी थे। आनन्द के हिस्से में लक्ष्मी भी पड़ी थी, सरस्वती भी; विशम्भर फूटी तकदीर लेकर आया था। प्रोफेसरों ने दया करके एक छोटा-सा वजीफा दे दिया था। बस, यही उसकी जीविका थी। रूपमणि भी साल भर पहले उन्हीं के समकक्ष...

लिओनार्दो दा विंसी के उद्धरण Quotes of Leonardo da Vinci

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लिओनार्दो दा विंसी के उद्धरण Quotes of Leonardo da Vinci अच्छी तरह से बिताया गया दिन सुखद नींद लाता है और अच्छी तरह से बिताई गयी ज़िन्दगी सुखद मौत।  As a well-spent day brings happy sleep, so a life well spent brings happy death. लोगों को तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है I वे जो देखते हैं, वे जो तब देखते हैं जब उन्हें दिखाया जाता है, और वे जो नहीं देखते हैं। There are three classes of people: those who see, those who see when they are shown, those who do not see. वह, जो सिद्धांत के बिना व्यवहार को पसंद करता है, उस नाविक के समान होता है जो बिना पतवार और कुतुबनुमा के जहाज़ पर सवार हो जाता है और यह जानता ही नहीं कि वह कहाँ जा पहुँचेगा। He who loves practice without theory is like the sailor who boards ship without a rudder and compass and never knows where he may cast. एक बार उड़ने का स्वाद चख लेने के बाद जब तुम ज़मीन पर चलोगे तो तुम्हारी आँखें आसमान की ओर देखती रहेंगी, क्योंकि वहाँ तुम कभी थे और वापस फिर से वहाँ होने के लिए तुम ललकते रहोगे। For once you have ta...

एक मजदूर महिला का अदालत में बयान व फांसी के तख्‍ते पर जा रहे मजदूर का अपनी पत्‍नी व बच्‍चों को पत्र

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एक मजदूर महिला का अदालत में बयान व फांसी के तख्‍ते पर जा रहे मजदूर का अपनी पत्‍नी व बच्‍चों को पत्र ये हैं मई दिवस के शहीद कॉमरेड अल्‍बर्ट पार्सन्‍स की जीवनसाथी लूसी पार्सन्‍स। दुनियाभर के मजदूरों को आठ घण्‍टे काम, आठ घण्‍टे आराम, आठ घण्‍टे मनाेरंजन के अधिकार के लिए संघर्ष करने को प्रेरित करने वाले मई दिवस के शहीदों का पूँजीपतियों ने जो दमन किया वो दिखाता है कि जब मजदूर एकजुट होता है तो वो किसी भी तरह के झूठ, फरेब का सहारा लेकर मजदूरों को मरवाते हैं, दबाते हैं। मई दिवस के शहीदों को मारने के पांच साल बाद उसी अदालत ने उन्‍हें बरी किया और कहा कि उनके खिलाफ सबूत अपर्याप्‍त थे। लूसी पार्सन्‍स का अदालत में दिया बयान नीचे दिया जा रहा है जो बताता है कि किस तरह मजदूर नायकों के परिवार भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे थे। अल्‍बर्ट पार्सन्‍स ने लूसी और अपने बच्चों को जो पत्र लिखे, वो भी उसके बाद दिया जा रहा है जो दिखाता है कि मजदूर नायक किन आदर्शों के लिए अपना जीवन कुर्बान कर रहे थे।  अदालत में लूसी पार्सन्स का बयान ‘‘जज आल्टगेल्ड, क्या आप इस बात से इन्कार करेंगे कि आपक...

कविता - मैं एक ऐसे प्रधानमंत्री को जानता हूँ / हरमीस बोहेमियन

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मैं एक ऐसे प्रधानमंत्री को जानता हूँ    हरमीस बोहेमियन _________________________________ मानव-सभ्यता के सबसे क्रूरतम हत्यारे की हँसी अय्याश आततायी की सौम्यता   और धूर्ततम चोर के आँसू   एक उचित और निश्चित मात्रा में मिलाने से   तैयार होती है उसकी शक्ल The Dictator By BenHeine वह खाने में दंगा पसंद करता है   और पीने में विरोधियों का लहू   यूँ तो वह भय का खेल खेलता है   पर हत्या और गद्दारी उसके मुख्य शौक हैं उसकी उपस्थिति से मुझे लाखों मनुष्यों   के जलने की चीख और दुर्गंध आती है उसकी भाषा इतनी गिर चुकी है कि शब्दों को घिन्न आती है उसकी ज़ुबान तक जाने में मैंने उसे एक दिन संसद की छत पर टहलते देखा था   उसकी देह पर कपड़े तो थे   पर वो नंगा दिख रहा था   उसकी देह हजार हत्याओं के खून से सनी हुई थी उसने एक दिन मुझे बताया था कि   देश उसके सपने में भेड़ की शक्ल में आता है   जिसे वह सवेरा होने के पहले ही   भूनकर खा जाता है काफी मुमकिन है ...

फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता विरोधी दस प्रसिद्ध कविताएं

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फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता विरोधी दस प्रसिद्ध कविताएं (1) राजा ने आदेश दिया -- देवी प्रसाद मिश्र राजा ने आदेश दिया : बोलना बन्द क्योंकि लोग बोलते हैं तो राजा के विरुद्ध बोलते हैं राजा ने आदेश दिया : लिखना बन्द क्योंकि लोग लिखते हैं तो राजा के विरुद्ध लिखते हैं राजा ने आदेश दिया : चलना बन्द क्योंकि लोग चलते हैं तो राजा के विरुद्ध चलते हैं राजा ने आदेश दिया : हँसना बन्द क्योंकि लोग हँसते हैं तो राजा के विरुद्ध हँसते हैं राजा ने आदेश दिया : होना बन्द क्योंकि लोग होते हैं तो राजा के विरुद्ध होते हैं इस तरह राजा के आदेशों ने लोगों को उनकी छोटी-छोटी क्रियाओं का महत्त्व बताया (2) अन्धी वतन परस्ती हमको किस रस्ते ले जायेगी -- गौहर रज़ा (04-03-2016) धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या-क्या स्वांग रचायेगी मसली कलियाँ, झुलसा गुलशन, ज़र्द खि़ज़ाँ दिखलायेगी यूरोप जिस वहशत से अब भी सहमा-सहमा रहता है खतरा है यह वहशत मेरे मुल्क में आग लगायेगी जर्मन गैसकदों से अबतक खून की बदबू आती है अन्धी वतन परस्ती हम को उस रस्ते ले जायेगी अन्धे कुएँ में झूठ की नाव तेज़ चली ...