क्रान्तिकारी कवि अवतार सिंह पाश की बीस कविताएं
क्रान्तिकारी कवि अवतार सिंह पाश की बीस कविताएं अवतार सिंह पाश (9 सितम्बर 1950-23 मार्च 1988) - एक ऐसा कवि जिससे भारत में थोड़ा भी पढ़ने लिखने वाला व्यक्ति परिचित है। त्रासदी यह भी कि भगतसिंह को आदर्श मानने वाले पाश को भगतसिंह के ही शहादत दिन 23 मार्च 1988 को खालिस्तानियों द्वारा मार दिया गया। धार्मिक कट्टरपंथ और सरकारी आतंकवाद दोनों के साथ एक ही समय लड़ने वाले पाश का वही सपना था जो भगतसिंह का था। कविताओं के लिए ही पाश को 1970 में इंदिरा गांधी सरकार ने दो साल के लिए जेल में डाला था। यूँ तो उनकी हर कविता बार-बार पढ़ने लायक है पर यहां प्रतिनिधि बीस कविताएं दे रहे हैं। ________________________ सपने सपने हर किसी को नहीं आते बेजान बारूद के कणों में सोयी आग को सपने नहीं आते बदी के लिए उठी हुई हथेली पर आये पसीने को सपने नहीं आते शैल्फ़ों में पड़े इतिहास के ग्रन्थों को सपने नहीं आते सपनों के लिए लाजिमी है सहनशील दिलों का होना सपनों के लिए नींद की नज़र होनी लाजिमी है सपने इसीलिए सभी को नहीं आते ________________________ सबसे ख़तरनाक ...