कहानी - थैंक यू, मैम / लैंग्स्टन ह्यूज़ Story - Thank You, Ma'am / Langston Hughes
कहानी - थैंक यू, मैम लैंग्स्टन ह्यूज़ अनुवाद - यादवेंद्र For English version please scroll down वह बड़ी कद काठी की हृष्ट पुष्ट स्त्री थी और उसके हाथ में उस जैसा ही एक बड़ा सा पर्स था - पर्स में दुनिया भर का सामान ठुँसा पड़ा था , बस हथौड़ा और कीलों को छोड़ कर। पर्स का खूब लंबा पट्टा उसने अपने कंधे पर टाँगा हुआ था ... रात के करीब ग्यारह बज रहे थे , सुनसान सड़क पर वह अकेली जा रही थी कि पीछे से दौड़ता हुआ एक लड़का पास आया और उसका पर्स झपट कर भागने की कोशिश करने लगा। लड़के के धक्के के पहले ही झटके में पट्टा टूट गया पर ; लड़के का अपना वजन और पर्स का भार मिलकर इतना हो गया कि वह सँभल नहीं पाया और लड़खड़ाकर वहीं सड़क के बीचों बीच पीठ के बल गिर पड़ा। भारी भरकम स्त्री झटक कर फुर्ती से पीछे मुड़ी और लड़के की आसमान में उठी टाँग पकड़ कर तड़ातड़ पीटने लगी। उसके बाद नीचे झुक कर उसने लड़के का कॉलर पकड़ लिया ... ऐसे दनादन झापड़ रसीद करने लगी कि उसके दाँत किट...